कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग द्वारा “सेव द यूटरेस प्रिंसीपल एण्ड प्रोटोकाल” (बच्चेदानी बचाओ सिद्धांत एवं उपाय) विषय पर एक महत्वपूर्ण पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विभिन्न स्त्री रोग संबंधी जटिलताओं में अनावश्यक गर्भाशय निष्कासन (हिस्टेरेक्टॉमी) से बचाव, गर्भाशय संरक्षण की आधुनिक उपचार पद्धतियों और मरीज-केंद्रित चिकित्सा के सिद्धांतों पर विस्तार से विचार-विमर्श करना था।
विभागध्यक्ष डॉ. सीमा द्विवेदी ने बताया कि गर्भाशय की ऐसी अनेक बीमारियां हैं, जिनका दवाओं और आधुनिक तकनीकों द्वारा सफल इलाज संभव है। उन्होंने कहा, हर बीमारी में गर्भाशय निकालने की आवश्यकता नहीं होती। इस विषय में केवल डॉक्टरों को ही नहीं, बल्कि मरीजों को भी जागरूक होना चाहिए। चर्चा के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि उचित मामलों में आधुनिक चिकित्सा एवं शल्य तकनीकों के माध्यम से गर्भाशय को सुरक्षित रखते हुए प्रभावी उपचार संभव है। विशेषज्ञों ने गर्भाशय से संबंधित रोगों के इलाज में सही रोग-निदान (डायलॉग), मरीज की आयु और भविष्य में संतान प्राप्ति की इच्छा को ध्यान में रखते हुए उपचार चुनने के महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम ने चिकित्सकों को व्यावहारिक परिस्थितियों में सही निर्णय लेने का मंच प्रदान किया। चर्चा में विशेषज्ञ के रूप में डॉ. सीमा द्विवेदी, डॉ. नीना गुप्ता, डॉ. रेनू गुप्ता, डॉ. शैली अग्रवाल एवं डॉ. बंदना शर्मा ने अपने अनुभव साझा किए। वहीं पैनलिस्ट डॉ. प्रज्ञा त्रिवेदी, डॉ. भारती शर्मा, डॉ. मीनाक्षी, डॉ. प्रीति, डॉ. फरहीन, डॉ. नूर एवं डॉ. दीप्ति ने सक्रिय सहभागिता की। कार्यक्रम का सफल समन्वय डॉ. पविका लाल एवं डॉ. करिश्मा शर्मा द्वारा किया गया।
डॉक्टरों ने दिया “सेव द यूटरेस” का संदेश

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