स्ट्रासबर्ग, 17 सितंबर (वेब वार्ता)। यूरोपीय संघ बच्चों को सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेम और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित चैटबॉट के संभावित खतरों से बचाने के लिए उम्र आधारित नई पाबंदियां लागू करने की तैयारी कर रहा है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने 16 सितंबर को स्ट्रासबर्ग में अपने वार्षिक ‘स्टेट ऑफ द यूरोपियन यूनियन’ भाषण के दौरान बच्चों के डिजिटल प्लेटफॉर्म इस्तेमाल को लेकर नए नियमों का प्रस्ताव रखा।
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, वॉन डेर लेयेन ने 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेम और चैटबॉट जैसी सेवाओं पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, यह अभी प्रस्तावित योजना है और इसे लागू करने के लिए यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के बीच विचार-विमर्श तथा विधायी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
13 से 15 वर्ष के बच्चों के लिए ‘मिनी अकाउंट’ का प्रस्ताव
प्रस्तावित योजना के तहत 13 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों के लिए अभिभावकों की निगरानी में सीमित सुविधाओं वाले ‘मिनी अकाउंट’ की व्यवस्था की जा सकती है। इन खातों में सामान्य सोशल मीडिया प्रोफाइल की तुलना में अधिक सुरक्षा नियंत्रण होंगे।
प्रस्ताव के अनुसार, 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए डिजिटल सेवाओं तक पहुंच को उम्र के आधार पर नियंत्रित किया जाएगा। तीन से 13 वर्ष की उम्र के बच्चों के लिए अभिभावकों की निगरानी में सुरक्षित डिजिटल विकल्प उपलब्ध कराने की बात कही गई है। वहीं, 13 से 15 वर्ष के बच्चों को सीमित सुविधाओं और समय संबंधी पाबंदियों के साथ सोशल मीडिया तथा वीडियो साझा करने वाले मंचों का इस्तेमाल करने की अनुमति देने का मॉडल सामने आया है।
लत लगाने वाले फीचर्स और हानिकारक सामग्री पर रोक का जोर
यूरोपीय आयोग का जोर ऐसे डिजिटल फीचर्स पर नियंत्रण लगाने पर भी है, जो बच्चों को लंबे समय तक किसी मंच पर बनाए रखने के लिए तैयार किए जाते हैं। प्रस्तावित नियमों में बच्चों को हानिकारक, आपत्तिजनक और उम्र के अनुरूप नहीं होने वाली सामग्री से बचाने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है।
प्रस्ताव के तहत बच्चों के खातों की गोपनीयता को डिफॉल्ट रूप से मजबूत रखने, अनजान लोगों के संपर्क को सीमित करने और आपत्तिजनक सामग्री की शिकायत करने की प्रक्रिया को आसान बनाने जैसे उपायों पर भी विचार किया जा रहा है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बनाई जा रही आपत्तिजनक तस्वीरों पर चिंता
उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने अपने भाषण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के गलत इस्तेमाल का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने विशेष रूप से लड़कियों की तस्वीरों का इस्तेमाल कर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से आपत्तिजनक या यौन प्रकृति की तस्वीरें बनाए जाने की समस्या पर चिंता जताई।
यूरोपीय संघ बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए पहले से लागू डिजिटल नियमों को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। विशेषज्ञों की एक समिति ने भी बच्चों की डिजिटल सुरक्षा, उम्र के अनुरूप ऑनलाइन सेवाओं के इस्तेमाल और अभिभावकीय नियंत्रण को लेकर कई सुझाव दिए हैं।
फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया में भी उम्र संबंधी पाबंदियों पर चर्चा
बच्चों को सोशल मीडिया के संभावित खतरों से बचाने की बहस केवल यूरोपीय संघ तक सीमित नहीं है। ऑस्ट्रेलिया में कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर कड़े नियम लागू किए गए हैं। वहीं, यूरोप के कई देश अपने स्तर पर उम्र आधारित प्रतिबंधों पर विचार कर रहे हैं।
फ्रांस में भी 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने की योजना सामने आई थी। हालांकि, वहां ऐसे प्रयासों को कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने यूरोपीय स्तर पर समान नियम बनाने के विचार का समर्थन किया है।
बड़ी तकनीकी कंपनियों पर बढ़ रहा दबाव
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर अमेरिका में भी बड़ी तकनीकी कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, मेटा ने अमेरिकी राज्यों के साथ हुए लगभग 18 अरब डॉलर के समझौते के तहत बच्चों और किशोरों की सुरक्षा के लिए उम्र जांच तथा अन्य सुरक्षा उपाय मजबूत करने पर सहमति जताई है।
यूरोपीय संघ की प्रस्तावित योजना में भी डिजिटल मंचों और तकनीकी कंपनियों पर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी बढ़ाने की बात कही गई है। हालांकि, प्रस्तावित नियमों का अंतिम स्वरूप सदस्य देशों के बीच चर्चा और कानून बनाने की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।




