नई दिल्ली, 21 जुलाई (वेब वार्ता)। नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर देशभर में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। राजधानी दिल्ली में विपक्ष के प्रदर्शन, नेताओं की हिरासत और रिहाई के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखीं। इनमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे, संसद में चर्चा तथा परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग प्रमुख रही। वहीं केंद्र सरकार ने कांग्रेस पर इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाया।
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— Congress (@INCIndia) July 21, 2026
मंगलवार को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस तथा इंडिया गठबंधन के नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कई अन्य नेताओं को हिरासत में लिया। राहुल गांधी को छत्रसाल स्टेडियम और प्रियंका गांधी को मंदिर मार्ग थाने ले जाया गया। बाद में रात में दोनों नेताओं को रिहा कर दिया गया।
राहुल गांधी ने रखीं पांच प्रमुख मांगें
रिहाई के बाद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के समक्ष पांच मांगें रखते हुए कहा कि विद्यार्थियों के साथ न्याय सुनिश्चित करने के लिए सरकार को तत्काल ठोस कदम उठाने चाहिए। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें।
- प्रदर्शनकारी छात्रों पर बल प्रयोग करने वाले पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए तथा छात्रों पर दर्ज सभी मामले वापस लिए जाएं।
- छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के लिए प्रधानमंत्री सार्वजनिक रूप से देश से क्षमा मांगें।
- प्रश्नपत्र लीक और छात्र आंदोलन के मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों में तत्काल चर्चा कराई जाए।
- परीक्षा प्रणाली और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक तथा प्रभावी सुधार लागू किए जाएं।
शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
राहुल गांधी ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि बार-बार प्रश्नपत्र लीक की घटनाएं क्यों हो रही हैं और उच्च शिक्षा इतनी महंगी क्यों होती जा रही है कि परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इन सवालों का जवाब सरकार को देना चाहिए और इन्हें उठाना पूरी तरह उचित है।
भारत के छात्रों को उनका हक और उन पर हुए अन्याय के लिए इंसाफ दिलाने के संघर्ष में हर कीमत छोटी है।
सत्ता की सारी ताकत लगाकर भी मोदी सरकार जवाबदेही से बच नहीं पाएगी। pic.twitter.com/qv7ZA4ysYJ
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सरकार का कांग्रेस पर पलटवार
राहुल गांधी के आरोपों पर केंद्र सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया दी। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि कांग्रेस का रुख विरोधाभासी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले विपक्ष संसद में चर्चा की मांग कर रहा था, लेकिन अब केवल इस्तीफे की राजनीति कर रहा है। उनके अनुसार, यह जिम्मेदार विपक्ष के अनुरूप व्यवहार नहीं है।
धर्मेंद्र प्रधान ने लगाया राजनीतिकरण का आरोप
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी सामाजिक माध्यम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार संसद में इस विषय पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस समाधान खोजने के बजाय केवल राजनीतिक प्रदर्शन और हंगामे के माध्यम से सुर्खियां बटोरने का प्रयास कर रही है। उनके अनुसार, सरकार परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है।
मोदी जी, हर ज़ोर आज़मा लो, सारी ताकत लगा लो – छात्रों के इंसाफ की ये लड़ाई अब रोके न रुकेगी। pic.twitter.com/suXh8LkWzh
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मुद्दे पर बढ़ा राजनीतिक टकराव
प्रश्नपत्र लीक विवाद अब केवल परीक्षा प्रणाली का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख मुद्दा बन चुका है। एक ओर विपक्ष सरकार से जवाबदेही तय करने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहा है, वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक मंचों पर इस मुद्दे पर बहस और तेज होने की संभावना है।




