नई दिल्ली, 22 जून (वेब वार्ता)। पंजाब में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ महत्वपूर्ण बैठक कर संगठन में एकजुटता पर जोर दिया। बैठक में उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि पार्टी में किसी भी प्रकार की गुटबाजी स्वीकार नहीं की जाएगी और सभी नेताओं को मिलकर संगठन को मजबूत करने के लिए कार्य करना होगा।
बैठक में पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, सांसद चरणजीत सिंह चन्नी, विजय इंदर सिंगला सहित अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य संगठनात्मक स्थिति की समीक्षा करना और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति तैयार करना था।
बैठक के बाद प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि राहुल गांधी ने सभी वरिष्ठ नेताओं से विस्तार से चर्चा की और संगठनात्मक मुद्दों पर उनके विचार जाने। उन्होंने बताया कि संगठन में संभावित बदलावों को लेकर अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व पर छोड़ दिया गया है। बाजवा ने दावा किया कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन से पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है और यदि सभी नेता एकजुट होकर काम करें तो वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस मजबूत वापसी कर सकती है।
अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा कि बैठक पूरी तरह आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर केंद्रित रही। उन्होंने बताया कि सभी नेताओं ने संगठन को मजबूत करने और जनता के बीच पार्टी की पहुंच बढ़ाने के संबंध में अपने सुझाव दिए। वड़िंग ने भारतीय जनता पार्टी की पंजाब में राजनीतिक गतिविधियों पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य की जनता किसी भी प्रकार की राजनीतिक थोपने की कोशिश को स्वीकार नहीं करेगी।
बैठक के दौरान संगठनात्मक बदलावों को लेकर भी चर्चा हुई। पार्टी के प्रदेश नेतृत्व में संभावित परिवर्तन को लेकर विभिन्न नामों पर विचार किए जाने की चर्चा है। राजनीतिक हलकों में सांसद चरणजीत सिंह चन्नी और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा के नाम भी संभावित विकल्पों के रूप में सामने आ रहे हैं। हालांकि पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
सूत्रों के अनुसार, पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी को समाप्त करना पार्टी नेतृत्व की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। राहुल गांधी पहले भी पंजाब दौरे के दौरान नेताओं को स्पष्ट संदेश दे चुके हैं कि संगठन हित में कार्य नहीं करने वाले नेताओं के प्रति सख्त रुख अपनाया जाएगा।
इस बैठक से पहले पार्टी की ओर से नियुक्त पर्यवेक्षकों ने भी सांसदों, विधायकों, पूर्व मंत्रियों और जिला अध्यक्षों सहित कई नेताओं से अलग-अलग मुलाकात कर संगठन की स्थिति और स्थानीय स्तर के मुद्दों पर उनकी राय ली थी। प्रताप सिंह बाजवा ने बताया कि उन्होंने भी अपनी बात विस्तार से पार्टी नेतृत्व के समक्ष रखी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस संगठनात्मक मजबूती और आंतरिक मतभेदों को समाप्त करने की दिशा में सक्रिय दिखाई दे रही है। ऐसे में राहुल गांधी की यह बैठक आगामी चुनावी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।




