मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों और शिक्षकों की जिम्मेदारी केवल शिक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को सत्य और असत्य के बीच अंतर समझाने की भी है। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे युवाओं को तथ्य आधारित जानकारी का महत्व समझाएं और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करें।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज बड़ी संख्या में युवा स्मार्टफोन और विभिन्न डिजिटल माध्यमों के जरिए जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। ऐसे में बिना सत्यापन वाली सूचनाओं पर विश्वास करने की प्रवृत्ति समाज के लिए चुनौती बन सकती है। उन्होंने कहा कि हर डिजिटल सामग्री को प्रमाणिक नहीं माना जा सकता, इसलिए विद्यार्थियों को पुस्तकों, शोध सामग्री और विश्वसनीय संदर्भ स्रोतों के अध्ययन की ओर भी प्रेरित किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने आधुनिक तकनीक के महत्व को स्वीकार करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सामाजिक माध्यम, ड्रोन प्रौद्योगिकी, त्रि-आयामी मुद्रण और रोबोटिकी जैसे क्षेत्रों में युवाओं को दक्ष बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वविद्यालयों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप नए पाठ्यक्रम और दोहरी उपाधि जैसी व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने का आह्वान किया।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने तकनीकी संस्थानों में आधुनिक प्रौद्योगिकी आधारित प्रशिक्षण सुविधाओं का विस्तार किया है, जिससे विद्यार्थियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल प्राप्त हो सके। साथ ही उन्होंने शिक्षकों से कक्षाओं को अधिक संवादात्मक और रोचक बनाने की अपील की, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई में रुचि बनी रहे।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने भारतीय शिक्षा परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरु की भूमिका केवल ज्ञान देने तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह विद्यार्थियों की प्रतिभा को निखारने का कार्य भी करता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को केवल उपाधि प्रदान करने वाले संस्थान नहीं, बल्कि शोध, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के केंद्र के रूप में विकसित होना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान प्राचीन तक्षशिला विश्वविद्यालय और विख्यात वैद्य जीवक का दृष्टांत देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय परंपरा में गुरु की भूमिका योजक की होती है, जो छात्रों की सोई हुई योग्यताओं को उभारता है। सीएम ने स्पष्ट किया कि जब भी भारत अपने स्वर्ण युग की ओर बढ़ता है, विदेशी हमले तेज हो जाते हैं। ऐसे में हमारे विश्वविद्यालय केवल डिग्री बांटने के केंद्र न रहें, बल्कि वे नवाचार, शोध और राष्ट्रभक्ति के ऐसे मजबूत दुर्ग बनें जो दिग्भ्रमित समाज को सकारात्मक दिशा दे सकें। समारोह में कुलपति आशु रानी, केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो एसपी सिंह बघेल, उच्च शिक्षामंत्री मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय, प्रभारी मंत्री भूपेंद्र चौधरी, सांसद राजकुमार चाहर आदि जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।




