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घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या में तेज़ बढ़ोतरी, मई में डेढ़ करोड़ से अधिक लोगों ने किया सफर

नई दिल्ली, 08 जुलाई (वेब वार्ता)। भारत में घरेलू हवाई यात्रा लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय की ताज़ा मासिक रिपोर्ट के अनुसार मई 2026 में देश के भीतर 1.53 करोड़ से अधिक यात्रियों ने हवाई यात्रा की। यह संख्या अप्रैल 2026 की तुलना में लगभग 11 प्रतिशत अधिक है, जबकि पिछले वर्ष के मई माह के मुकाबले 9.49 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। बढ़ती यात्री संख्या से स्पष्ट है कि देश में घरेलू हवाई यात्रा की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार जनवरी से मई 2026 के बीच घरेलू विमान सेवाओं के माध्यम से 729.40 लाख यात्रियों ने यात्रा की, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 715.70 लाख था। इस प्रकार पहले पांच महीनों में कुल यात्री संख्या में 1.91 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

यात्रियों की संख्या के मामले में इंडिगो देश की सबसे बड़ी विमान सेवा कंपनी बनी हुई है। हालांकि उसकी बाजार हिस्सेदारी घटकर 64.9 प्रतिशत रह गई है। दूसरी ओर एयर इंडिया समूह की हिस्सेदारी बढ़कर 25.6 प्रतिशत हो गई है। अकासा एयर ने 5.8 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी बनाए रखी, जबकि स्पाइसजेट की हिस्सेदारी घटकर 2.5 प्रतिशत पर पहुंच गई।

समय पर उड़ान संचालन के मामले में भी इंडिगो ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। मई माह में देश के दस प्रमुख हवाई अड्डों पर उसकी 82.8 प्रतिशत उड़ानें निर्धारित समय पर संचालित हुईं। इसके बाद अकासा एयर 78.3 प्रतिशत और एयर इंडिया समूह 74.5 प्रतिशत समयबद्ध उड़ानों के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। अलायंस एयर की समयबद्धता 70.5 प्रतिशत रही, जबकि स्पाइसजेट का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा और उसकी केवल 26.5 प्रतिशत उड़ानें समय पर संचालित हो सकीं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मई माह के दौरान 0.55 प्रतिशत उड़ानें रद्द हुईं, जिससे 63,723 यात्री प्रभावित हुए। प्रभावित यात्रियों को मुआवजा तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विमान सेवा कंपनियों ने 70.32 लाख रुपये खर्च किए।

इसके अतिरिक्त 1.77 लाख से अधिक यात्रियों को उड़ानों में देरी का सामना करना पड़ा। वहीं विभिन्न कारणों से 900 यात्रियों को विमान में सवार होने की अनुमति नहीं दी गई। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के आंकड़े बताते हैं कि यात्रियों की बढ़ती संख्या के साथ विमान सेवाओं पर परिचालन संबंधी दबाव भी बढ़ा है, जिसके चलते समयबद्ध संचालन और यात्री सुविधाओं को और बेहतर बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

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