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लेबनान समझौते को ईरान के लिए बड़ा रणनीतिक झटका बताया नेतन्याहू, दक्षिणी लेबनान में सेना रहेगी तैनात

यरुशलम | अंतरराष्ट्रीय डेस्क | वेब वार्ता

Israel Lebanon Framework Agreement को लेकर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने इजरायल और लेबनान के बीच हुए नए रूपरेखा समझौते को ईरान के लिए “बड़ा रणनीतिक झटका” करार देते हुए कहा कि जब तक हिजबुल्ला पूरी तरह निरस्त्र नहीं हो जाता और इजरायल की सुरक्षा के लिए खतरा बना रहता है, तब तक इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान के सुरक्षा क्षेत्र में तैनात रहेगी। यह समझौता अमेरिका की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच व्यापक शांति प्रक्रिया की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

⚡ संक्षिप्त वार्ता (Quick Info)

  • इजरायल-लेबनान के बीच नया रूपरेखा समझौता हुआ।
  • नेतन्याहू ने इसे ईरान के लिए बड़ा रणनीतिक झटका बताया।
  • हिजबुल्ला के निरस्त्रीकरण तक दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना तैनात रहेगी।
  • लेबनानी सेना चरणबद्ध तरीके से सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेगी।
  • अमेरिका की मध्यस्थता में समझौते पर वाशिंगटन में हस्ताक्षर हुए।
  • समझौता व्यापक शांति प्रक्रिया की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Israel Lebanon Framework Agreement पर नेतन्याहू का बड़ा बयान

वाशिंगटन में समझौते पर हस्ताक्षर के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि लंबी वार्ता के बाद ऐसा परिणाम सामने आया है, जिसने इजरायल की सुरक्षा संबंधी प्राथमिकताओं को मजबूती दी है। उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि यह है कि दक्षिणी लेबनान के सुरक्षा क्षेत्र में इजरायली सेना की मौजूदगी तब तक बनी रहेगी, जब तक हिजबुल्ला पूरी तरह निरस्त्र नहीं हो जाता और सुरक्षा खतरा समाप्त नहीं हो जाता।

नेतन्याहू ने कहा कि यह समझौता केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र में ईरान के प्रभाव को सीमित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार इजरायल, लेबनान और अमेरिका का यह संदेश स्पष्ट है कि लेबनान के आंतरिक सुरक्षा मामलों में ईरान की भूमिका स्वीकार्य नहीं होगी।

इस समझौते की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?रूपरेखा समझौते के तहत लेबनानी सशस्त्र बल (LAF) को चरणबद्ध तरीके से दक्षिणी लेबनान के विभिन्न क्षेत्रों का नियंत्रण सौंपा जाएगा। इसके साथ ही सभी गैर-राज्य सशस्त्र संगठनों के निरस्त्रीकरण की दिशा में भी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।

समझौते की प्रमुख बातें

मुख्य बिंदुविवरण
समझौताइजरायल-लेबनान रूपरेखा समझौता
मध्यस्थसंयुक्त राज्य अमेरिका
मुख्य उद्देश्यसंघर्ष समाप्त करना और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना
लेबनान की जिम्मेदारीपूरे देश में सरकारी नियंत्रण और गैर-राज्य हथियारबंद समूहों का निरस्त्रीकरण
इजरायल की वापसीसुरक्षा परिस्थितियों के अनुसार चरणबद्ध तरीके से
विशेष प्रावधानदो पायलट क्षेत्रों में नियंत्रण हस्तांतरण की प्रक्रिया

लेबनानी सेना को मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी

समझौते के अनुसार लेबनानी सशस्त्र बल (एलएएफ) पूरे देश में सुरक्षा और सैन्य नियंत्रण की जिम्मेदारी धीरे-धीरे संभालेगा। इसके बाद सुरक्षा परिस्थितियां अनुकूल होने पर इजरायली रक्षा बल (आईडीएफ) चरणबद्ध तरीके से दक्षिणी लेबनान से अपनी सैन्य तैनाती कम करेगा।

अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार कार्यान्वयन, सुरक्षा सत्यापन, निगरानी तंत्र और सेना की वापसी की समयसीमा से जुड़े विस्तृत प्रावधान अलग परिशिष्ट में शामिल किए जाएंगे, जिसे अमेरिका के समन्वय से अंतिम रूप दिया जाएगा।

इस समझौते का क्षेत्रीय असर क्या होगा?विशेषज्ञों के अनुसार यदि समझौते का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो दक्षिणी लेबनान में तनाव कम हो सकता है। हालांकि हिजबुल्ला के निरस्त्रीकरण, इजरायली सेना की वापसी और सुरक्षा व्यवस्था के सफल संचालन पर ही इसकी सफलता निर्भर करेगी। ईरान, लेबनान और इजरायल के बीच शक्ति संतुलन पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

अमेरिका की भूमिका रही अहम

इस रूपरेखा समझौते की घोषणा वाशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इजरायल और लेबनान के राजनयिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी में की। इसका उद्देश्य इजरायल और हिजबुल्ला के बीच हुए संघर्ष विराम को दीर्घकालिक शांति व्यवस्था में बदलना और सीमा क्षेत्र में स्थिरता स्थापित करना है।

आने वाले समय में समझौते के क्रियान्वयन, लेबनानी सेना की तैनाती और इजरायली बलों की चरणबद्ध वापसी पर पूरे क्षेत्र की नजर बनी रहेगी।

 

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