आइजोल | राष्ट्रीय डेस्क | वेब वार्ता
Mizoram Disaster Loss Report के अनुसार वर्ष 2021 से 2025 के बीच प्राकृतिक आपदाओं और बीमारियों के प्रकोप से मिजोरम को 1,291 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) की बैठक में प्रस्तुत पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेसमेंट (PDNA) रिपोर्ट में बताया गया कि चक्रवात, भारी बारिश से भूस्खलन, अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) और चूहों के प्रकोप जैसी घटनाओं ने राज्य के बुनियादी ढांचे, कृषि और अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाला। मुख्यमंत्री लालदुहोमा की अध्यक्षता में हुई बैठक में आपदा प्रबंधन योजनाओं और पुनर्निर्माण रणनीति की भी समीक्षा की गई।
- 2021-2025 के बीच कुल 1,291 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान।
- 656.76 करोड़ रुपये की प्रत्यक्ष क्षति दर्ज की गई।
- 634.35 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ।
- रिकवरी और पुनर्निर्माण के लिए 879.82 करोड़ रुपये की आवश्यकता आंकी गई।
- 178 पुनर्निर्माण परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।
- राज्य आपदा प्रबंधन योजना-2026 की भी समीक्षा हुई।
Mizoram Disaster Loss Report में क्या सामने आया?
पीडीएनए रिपोर्ट के अनुसार प्राकृतिक आपदाओं और रोग प्रकोपों ने राज्य को कुल 1,291.11 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया। इनमें 656.76 करोड़ रुपये की प्रत्यक्ष क्षति तथा 634.35 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान शामिल है। रिपोर्ट में बताया गया कि चक्रवात रेमल, अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF), लगातार भारी बारिश से हुए भूस्खलन और कई क्षेत्रों में चूहों के प्रकोप ने सबसे अधिक प्रभाव डाला।
पांच वर्षों के नुकसान का विवरण
| विवरण | राशि |
|---|---|
| प्रत्यक्ष क्षति | 656.76 करोड़ रुपये |
| आर्थिक नुकसान | 634.35 करोड़ रुपये |
| कुल नुकसान | 1,291.11 करोड़ रुपये |
| रिकवरी एवं पुनर्निर्माण की अनुमानित आवश्यकता | 879.82 करोड़ रुपये |
आपदा प्रबंधन को मजबूत करने पर जोर
बैठक में मिजोरम राज्य आपदा प्रबंधन योजना-2026 और सभी 11 जिलों की आपदा प्रबंधन योजनाओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने राज्य की आपदा तैयारी, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और जोखिम न्यूनीकरण तंत्र को और मजबूत बनाने पर बल दिया।
राष्ट्रीय भूस्खलन जोखिम न्यूनीकरण परियोजना, राष्ट्रीय भूकंप जोखिम न्यूनीकरण परियोजना और वनाग्नि जोखिम प्रबंधन योजना के अंतर्गत गठित प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट्स (PMUs) को अधिक प्रभावी बनाने पर भी चर्चा हुई।
दीर्घकालिक रणनीति पर रहेगा फोकस
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए मिजोरम को मजबूत आपदा प्रबंधन प्रणाली, आधुनिक चेतावनी तंत्र, बेहतर बुनियादी ढांचा और सामुदायिक भागीदारी पर आधारित रणनीति अपनानी होगी। इससे भविष्य में होने वाले आर्थिक और सामाजिक नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।




