मुंबई, 02 जून (वेब वार्ता)। भारतीय संगीत जगत की दिग्गज पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का रविवार शाम मुंबई में 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से संगीत और फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। सोमवार को उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ पवनहंस श्मशान घाट में किया गया।
परिवार और करीबी सूत्रों के अनुसार, सुमन कल्याणपुर पिछले कुछ दिनों से अपने ही गाए गीत सुन रही थीं। रविवार रात उन्होंने शांतिपूर्वक दुनिया को अलविदा कहा। उनके निधन की खबर सामने आते ही संगीत प्रेमियों और फिल्म जगत की हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रधानमंत्री ने जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुमन कल्याणपुर के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनकी मधुर आवाज और भावपूर्ण गायकी ने भारतीय सांस्कृतिक जगत को समृद्ध बनाया। प्रधानमंत्री ने उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।
11 भाषाओं में गाए तीन हजार से अधिक गीत
सुमन कल्याणपुर ने अपने लंबे संगीत करियर में हिंदी सहित 11 भाषाओं में तीन हजार से अधिक फिल्मी और गैर-फिल्मी गीतों को स्वर दिया। उन्होंने 1960 और 1970 के दशक में अपनी सुरीली आवाज के दम पर संगीत जगत में विशिष्ट पहचान बनाई।
उनके गाए गीत ‘आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे’, ‘ना ना करते प्यार तुम्हीं से’ और ‘तुमने पुकारा और हम चले आए’ आज भी श्रोताओं की पसंद बने हुए हैं। हिंदी के अलावा उन्होंने मराठी, असमी, कन्नड़, बंगाली और ओड़िया भाषाओं में भी कई यादगार गीत गाए।
लता मंगेशकर से होती थी तुलना
सुमन कल्याणपुर की आवाज की तुलना अक्सर लता मंगेशकर से की जाती थी। उनकी गायकी का अंदाज और सुरों पर पकड़ इतनी समान मानी जाती थी कि कई बार श्रोता दोनों की आवाज में अंतर नहीं कर पाते थे।
हालांकि सुमन कल्याणपुर हमेशा इस तुलना को सहजता से खारिज करती थीं। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि लता मंगेशकर उनकी अच्छी मित्र थीं और उनसे मिलना किसी करीबी सहेली से मिलने जैसा अनुभव होता था।
मोहम्मद रफी के साथ दिए कई यादगार गीत
साठ के दशक में जब लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी के बीच मतभेद की खबरें सामने आईं, तब कई संगीतकारों ने सुमन कल्याणपुर को प्राथमिकता दी। उन्होंने मोहम्मद रफी के साथ अनेक लोकप्रिय युगल गीत गाए, जो आज भी संगीत प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
सुमन कल्याणपुर ने एक साक्षात्कार में स्वीकार किया था कि वह लता मंगेशकर की गायकी से प्रभावित थीं। उन्होंने कहा था कि उनकी आवाज स्वाभाविक रूप से पतली और मधुर थी, जिसके कारण लोगों को अक्सर भ्रम हो जाता था।
‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ को लेकर किया था दावा
एक कार्यक्रम के दौरान दिए गए साक्षात्कार में सुमन कल्याणपुर ने दावा किया था कि प्रसिद्ध देशभक्ति गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ मूल रूप से उनके लिए तैयार किया गया था। उन्होंने बताया था कि वह इस गीत की प्रस्तुति की तैयारी भी कर चुकी थीं, लेकिन अंतिम समय में यह गीत किसी अन्य गायिका को दे दिया गया।
उन्होंने इसे अपने जीवन की सबसे बड़ी निराशाओं में से एक बताया था और कहा था कि यह घटना उन्हें लंबे समय तक याद रही।
संगीत की शिक्षा से बनीं सुरों की साधिका
सुमन कल्याणपुर का रुझान बचपन से ही संगीत और चित्रकला की ओर था। उन्होंने कला विषय में स्नातक की पढ़ाई की थी और प्रारंभ में चित्रकार बनना चाहती थीं। उनके पड़ोसी और परिवार के मित्र पंडित केशव राव भोले ने उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए संगीत शिक्षा लेने की सलाह दी थी।
इसके बाद उन्होंने उस्ताद खान अब्दुल रहमान खान और मास्टर नवरंग जैसे प्रतिष्ठित गुरुओं से संगीत की शिक्षा प्राप्त की। यही शिक्षा आगे चलकर उन्हें भारतीय संगीत जगत की अग्रणी गायिकाओं में शामिल करने का आधार बनी।
सुमन कल्याणपुर का निधन भारतीय संगीत के एक स्वर्णिम अध्याय के अंत के रूप में देखा जा रहा है। उनकी आवाज और उनके गीत आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा और संगीत का अनमोल खजाना बने रहेंगे।




