धार, 22 मई (वेब वार्ता)। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के बाद धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला में शुक्रवार को हिंदू समाज द्वारा पूजा-अर्चना की प्रक्रिया शुरू हो गई। इसे ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है, क्योंकि लंबे अंतराल के बाद पहली बार शुक्रवार के दिन विधि-विधान के साथ पूजा संपन्न हो रही है। इस घटनाक्रम को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह देखा जा रहा है, वहीं प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं।
सुबह निर्धारित समय पर श्रद्धालु भोजशाला परिसर पहुंचे और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा प्रारंभ की। श्रद्धालुओं ने मां वाग्देवी को चुनरी अर्पित कर पुष्पांजलि दी और गर्भगृह को सजाया। दोपहर में महाआरती का आयोजन प्रस्तावित है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और ड्रोन तथा सीसीटीवी के माध्यम से निगरानी रखी जा रही है।
कमाल मौला मस्जिद के सदर अब्दुल समद ने लोगों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज अपनी बात कानूनी और संवैधानिक दायरे में रख रहा है और न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा बनाए हुए है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उच्चतम न्यायालय से राहत मिलने पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। साथ ही उन्होंने समाज से प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने और अमन-चैन बनाए रखने की अपील की।
जिला प्रशासन ने भी लोगों से अफवाहों से दूर रहने का आग्रह किया है। कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने कहा कि शहर में शांति, भाईचारा और कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि किसी भी भ्रामक सूचना पर विश्वास न करें।
पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा ने स्पष्ट किया कि सभी धार्मिक गतिविधियां न्यायालय और पुरातत्व विभाग के निर्देशों के अनुरूप ही संचालित होंगी। उन्होंने कहा कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और सुरक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
इस बीच श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया। स्थानीय निवासी विद्या सोनी ने कहा कि शुक्रवार को भोजशाला में पूजा कर पाना उनके लिए भावनात्मक और ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने इसे आस्था और सत्य की जीत बताया।
भोजशाला को लेकर वर्षों से चले आ रहे विवाद और न्यायिक प्रक्रिया के बीच आज का दिन ऐतिहासिक महत्व रखता है। प्रशासन की चुनौती अब धार्मिक गतिविधियों के बीच शांति और सौहार्द बनाए रखने की है, ताकि किसी भी प्रकार का तनाव उत्पन्न न हो।




