वाशिंगटन, 21 मई (वेब वार्ता)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी वार्ता को अंतिम चरण में बताया है, हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बातचीत उम्मीद से अधिक लंबी खिंच रही है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने संकेत दिया कि यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं होते तो अमेरिका कड़े विकल्पों पर भी विचार कर सकता है।
ट्रंप ने कहा कि वह क्षेत्र में बड़े युद्ध के बजाय सीमित स्तर पर तनाव या कम नुकसान वाली स्थिति को प्राथमिकता देंगे। उनके अनुसार आदर्श स्थिति वही होगी जिसमें कम से कम लोगों की जान जाए। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि समझौता नहीं होता तो अमेरिका अन्य विकल्पों पर भी विचार करने से पीछे नहीं हटेगा।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते के मसौदे को अंतिम रूप देने की कोशिशें जारी हैं। सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया है कि समझौते को लेकर जल्द महत्वपूर्ण घोषणा संभव है। पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका की भी चर्चा है और ऐसी अटकलें हैं कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
ट्रंप ने ईरान की आंतरिक परिस्थितियों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के कारण वहां असंतोष बढ़ रहा है और लोग कठिन हालात का सामना कर रहे हैं। ट्रंप के अनुसार यह स्थिति पहले की तुलना में अधिक गंभीर दिखाई दे रही है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या वार्ता अपेक्षा से अधिक समय ले रही है, तो ट्रंप ने इसकी तुलना अमेरिका की लंबी सैन्य तैनातियों से की। उन्होंने अफगानिस्तान, इराक और कोरिया का उल्लेख करते हुए कहा कि हालिया अभियानों में पहले के युद्धों की तुलना में कम अमेरिकी सैनिकों की जान गई है। ट्रंप ने कहा कि 13 लोगों की मौत भी बड़ी क्षति है, लेकिन अमेरिका ने लंबे सैन्य कब्जे के बिना भी रणनीतिक सफलताएं हासिल की हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच चल रही यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया में तनाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर वैश्विक चिंता बनी हुई है। तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी इन वार्ताओं का असर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस कूटनीतिक प्रक्रिया का परिणाम क्षेत्रीय स्थिरता के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।




