नई दिल्ली, 21 मई (वेब वार्ता)। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बृहस्पतिवार से प्रस्तावित तीन दिवसीय ट्रांसपोर्ट हड़ताल का असर आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ने की आशंका है। 23 मई तक चलने वाली इस हड़ताल के कारण व्यावसायिक वाहनों का संचालन प्रभावित हो सकता है, जिससे सब्जी, दूध, दवा और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित होने की संभावना जताई जा रही है।
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने दिल्ली में व्यावसायिक वाहनों पर बढ़ाए गए हरित शुल्क और बीएस-4 वाहनों के प्रवेश प्रतिबंध के विरोध में इस आंदोलन का आह्वान किया है। संगठन का दावा है कि दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के 126 परिवहन संगठन इस हड़ताल का समर्थन कर रहे हैं।
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि आंदोलन के दौरान वाहन जहां होंगे, वहीं खड़े कर दिए जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है।
अनुमान के अनुसार इस हड़ताल से प्रतिदिन 25 से 30 हजार व्यावसायिक वाहनों का संचालन प्रभावित हो सकता है। इनमें सात से 10 हजार वाहन खाद्य सामग्री, डेयरी उत्पाद और दवाओं जैसी आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई से जुड़े हैं। ऐसे में यदि हड़ताल पूरी तरह प्रभावी रही तो मंडियों से लेकर खुदरा बाजार तक इसका असर दिखाई दे सकता है और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
ट्रांसपोर्ट संगठनों का आरोप है कि बीएस-4 वाहनों पर बिना पर्याप्त वैज्ञानिक आधार के प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि हरित शुल्क में बढ़ोतरी से माल ढुलाई की लागत लगातार बढ़ रही है, जिसका सीधा असर परिवहन कारोबार और वस्तुओं की कीमतों पर पड़ रहा है।
हड़ताल की घोषणा के बाद व्यापारिक और परिवहन क्षेत्रों में चिंता बढ़ गई है। अब सभी की नजर सरकार और ट्रांसपोर्ट संगठनों के बीच संभावित बातचीत पर टिकी है, ताकि आवश्यक सेवाओं और आपूर्ति व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ने से रोका जा सके।




