बीजिंग, 15 मई (वेब वार्ता)। चीन की राजधानी बीजिंग स्थित ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी रहीं। दोनों देशों के बीच चल रहे व्यापारिक और रणनीतिक तनाव के बीच यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। हालांकि बैठक से ज्यादा चर्चा एक तस्वीर को लेकर शुरू हो गई, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही तस्वीर में देखा गया कि जैसे ही शी जिनपिंग अपनी सीट से उठकर आगे बढ़ते हैं, उसी दौरान डोनाल्ड ट्रंप हल्का सा झुककर उनकी मेज पर रखी नोटबुक खोलते हैं और उस पर नजर डालते दिखाई देते हैं। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री शांत भाव से वहां मौजूद नजर आए। तस्वीर सामने आने के बाद दुनियाभर में इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
ट्रंप और शी जिनपिंग की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब दुनिया व्यापारिक प्रतिस्पर्धा, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। बाहर से माहौल सौहार्दपूर्ण दिखाई दिया, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि बातचीत के भीतर कई संवेदनशील विषय शामिल रहे होंगे।
बैठक की शुरुआत में शी जिनपिंग ने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को दुनिया के लिए “नया चौराहा” बताया। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या चीन और अमेरिका तथाकथित “थ्यूसीडिडीज ट्रैप” से ऊपर उठ सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह वह स्थिति होती है जब कोई उभरती शक्ति किसी स्थापित महाशक्ति को चुनौती देती है और इससे टकराव की आशंका बढ़ जाती है।
शी जिनपिंग ने कहा कि दोनों देशों को प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि साझेदार के रूप में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि चीन और अमेरिका यदि सहयोग की भावना से कार्य करें तो वैश्विक स्थिरता और आर्थिक विकास को नई दिशा मिल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे की सफलता में सहयोगी बनना चाहिए।
वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने भी बैठक के दौरान शी जिनपिंग की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि चीन और अमेरिका के संबंध आने वाले समय में और मजबूत होंगे। ट्रंप ने कहा कि शी जिनपिंग के साथ मित्रता उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से शी जिनपिंग को “महान नेता” बताते हुए कहा कि वह अपनी राय बदलने वाले नहीं हैं, चाहे किसी को यह पसंद आए या नहीं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात केवल औपचारिक कूटनीतिक बैठक नहीं थी, बल्कि दुनिया की दो सबसे बड़ी आर्थिक शक्तियों के बीच भविष्य की रणनीतिक दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण वार्ता भी थी। वहीं नोटबुक वाली तस्वीर ने इस पूरे घटनाक्रम को और अधिक चर्चित बना दिया है।




