नई दिल्ली, 13 मई (वेब वार्ता)। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने राजधानी की विश्वविद्यालयों को केवल डिग्री देने वाले संस्थान तक सीमित न रहने की सलाह देते हुए उन्हें रिसर्च, नवाचार और सामाजिक बदलाव का केंद्र बनाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों को अब दिल्ली की वास्तविक समस्याओं के समाधान में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
बुधवार को उपराज्यपाल ने दिल्ली सरकार के अधीन आने वाली विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और निदेशकों के साथ बैठक की। बैठक में शिक्षा, अनुसंधान और तकनीक के माध्यम से दिल्ली के विकास को नई दिशा देने पर विस्तृत चर्चा हुई।
तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के विकसित भारत दृष्टिकोण के तहत शैक्षणिक संस्थानों को नवाचार और सामाजिक परिवर्तन का प्रमुख केंद्र बनना होगा। उन्होंने विश्वविद्यालयों से कहा कि वे केवल डिग्री वितरण तक सीमित न रहें, बल्कि अनुसंधान आधारित सोच विकसित कर शहर की जमीनी समस्याओं का समाधान खोजें।
बैठक में उपराज्यपाल ने विशेष रूप से वायु प्रदूषण, ट्रैफिक और शहरी परिवहन, मानसिक स्वास्थ्य तथा सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी चुनौतियों पर रिसर्च आधारित समाधान तैयार करने की आवश्यकता बताई। उनका कहना था कि विश्वविद्यालयों में मौजूद अनुसंधान क्षमता का सीधा लाभ आम नागरिकों तक पहुंचना चाहिए।
उन्होंने छात्रों की सामाजिक भागीदारी बढ़ाने पर भी बल दिया। उपराज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना, राष्ट्रीय कैडेट कोर और गांव गोद लेने जैसी योजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को समाज से जोड़ा जाए, ताकि वे जिम्मेदार नागरिक बनने के साथ रोजगार सृजन और नवाचार की दिशा में भी योगदान दे सकें।
Taranjit Singh Sandhu ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नई तकनीकों को भविष्य की जरूरत बताते हुए कहा कि दिल्ली की विश्वविद्यालयों को तकनीक आधारित और भविष्य के अनुरूप तैयार संस्थान बनाना आवश्यक है। उन्होंने सभी संस्थानों को समयबद्ध और प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए, जिससे शिक्षा और अनुसंधान का लाभ सीधे दिल्ली के लोगों तक पहुंच सके।




