सोना न खरीदने की अपील से ज्वेलरी कारोबार में हलचल, व्यापारियों ने जताई चिंता

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नई दिल्ली, 11 मई (वेब वार्ता)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से एक वर्ष तक सोना न खरीदने की अपील के बाद ज्वेलरी उद्योग में चिंता का माहौल बन गया है। दिल्ली सहित देशभर के ज्वेलरी व्यापारी, सुनार और छोटे कारोबारी इस अपील को लेकर आशंकित नजर आ रहे हैं। उद्योग से जुड़े संगठनों का कहना है कि इसका सीधा असर सोने की मांग, रोजगार और बाजार गतिविधियों पर पड़ सकता है।

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील सामने आने के तुरंत बाद बड़ी संख्या में व्यापारियों ने उनसे संपर्क किया और अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय शादी-विवाह का प्रमुख सीजन है और ऐसे समय में इस प्रकार की अपील से गहनों की मांग में भारी गिरावट आने की आशंका बढ़ गई है।

बृजेश गोयल के अनुसार भारत दुनिया में चीन के बाद सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है। देश में हर वर्ष लगभग 700 से 800 टन सोने की खपत होती है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यह खपत घटकर लगभग 500 टन तक पहुंच सकती है। उनका कहना है कि यदि मांग में इतनी बड़ी गिरावट आती है तो इसका व्यापक आर्थिक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

व्यापारिक संगठनों ने आशंका जताई है कि यदि लंबे समय तक सोने की बिक्री प्रभावित रही तो छोटे ज्वेलर्स और पारंपरिक सुनारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। कई कारोबारियों को कर्मचारियों का वेतन देने में कठिनाई हो सकती है और मजबूरन छंटनी जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं। कारोबारियों का कहना है कि इस तरह की अपीलों से ग्राहकों के मन में अनिश्चितता और डर का माहौल बनता है, जिसका सीधा असर खरीदारी पर पड़ता है।

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के महासचिव गुरमीत अरोड़ा और रमेश आहूजा ने कहा कि भारत में सोना केवल निवेश का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। विशेष रूप से शादियों में गहनों की खरीद को आवश्यक माना जाता है। ऐसे में यह अपील केवल व्यापार पर ही नहीं, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक परंपराओं पर भी असर डाल सकती है।

उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इसका प्रभाव शेयर बाजार पर भी दिखाई दे सकता है। टाइटन, सेनको गोल्ड और कल्याण ज्वेलर्स जैसी सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों पर दबाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। कारोबारियों का कहना है कि बदलती परिस्थितियों में ज्वेलरी उद्योग को अब नई व्यापारिक रणनीतियों पर काम करना होगा ताकि बाजार की गति बनी रहे और रोजगार प्रभावित न हो।

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