कैसे पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बने सुवेंदु अधिकारी, जानिए उनकी राजनीति और संघर्ष की कहानी

कोलकाता, 09 मई (वेब वार्ता)। पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार को नया इतिहास रचते हुए शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। बंगाल में पहली बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के साथ ही यह सवाल भी चर्चा में है कि आखिर भाजपा नेतृत्व ने मुख्यमंत्री पद के लिए सुवेंदु अधिकारी को ही क्यों चुना। संगठनात्मक पकड़, प्रशासनिक अनुभव, जनाधार और ममता बनर्जी के खिलाफ आक्रामक राजनीति जैसे कई कारण उनके पक्ष में गए।

पूर्व मिदनापुर जिले के कर्कुली गांव में वर्ष 1970 में जन्मे सुवेंदु अधिकारी को राजनीति विरासत में मिली। उनके पिता शिशिर अधिकारी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे और बाद में ममता बनर्जी के साथ तृणमूल कांग्रेस में सक्रिय हो गए। हालांकि बचपन में सुवेंदु अधिकारी का झुकाव राजनीति से अधिक धर्म और अध्यात्म की ओर था।

बताया जाता है कि वह नियमित रूप से रामकृष्ण मिशन जाया करते थे और घर से मिले पैसे व सिक्के वहां दान कर देते थे। परिवार को डर था कि कहीं वह संन्यास की राह न चुन लें। समय के साथ उनकी सोच बदली और उन्होंने छात्र राजनीति से सार्वजनिक जीवन में कदम रखा।

सुवेंदु अधिकारी ने कांथी के प्रभात कुमार कॉलेज से छात्र राजनीति की शुरुआत की। धीरे-धीरे उन्होंने पूर्व मेदिनीपुर और जंगलमहल क्षेत्र में मजबूत राजनीतिक आधार तैयार किया। चार दशकों के राजनीतिक अनुभव में उन्होंने संगठन और जनसंपर्क दोनों स्तरों पर अपनी अलग पहचान बनाई।

भाजपा नेतृत्व का भरोसा उन पर कितना मजबूत था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री पद के लिए आए सभी प्रस्तावों में केवल सुवेंदु अधिकारी का ही नाम था। गृह मंत्री अमित शाह ने स्वयं इसकी जानकारी देते हुए कहा कि बंगाल की कमान राज्य की मिट्टी से जुड़े नेता को ही सौंपी जाएगी।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सुवेंदु अधिकारी की सबसे बड़ी ताकत उनका जमीनी संगठन और कार्यकर्ताओं से सीधा जुड़ाव है। मेदिनीपुर से लेकर उत्तर बंगाल तक उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं का मजबूत नेटवर्क माना जाता है। यही कारण है कि भाजपा ने उन्हें बंगाल में सबसे प्रभावी चेहरे के रूप में आगे बढ़ाया।

सुवेंदु अधिकारी का चुनावी रिकॉर्ड भी काफी मजबूत रहा है। छात्रसंघ से लेकर सांसद तक वह नौ चुनाव लड़ चुके हैं, जिनमें केवल एक बार 2004 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। खास बात यह रही कि वर्ष 2021 और 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने ममता बनर्जी को सीधे मुकाबले में हराकर अपनी राजनीतिक ताकत साबित की।

एक समय ममता बनर्जी के सबसे करीबी नेताओं में शामिल रहे सुवेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस सरकार में परिवहन, सिंचाई, पर्यावरण और जल संसाधन जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली थी। प्रशासनिक अनुभव भी उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए मजबूत दावेदार बनाता रहा।

वर्ष 2020 में तृणमूल कांग्रेस से मतभेद बढ़ने के बाद उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। इसके बाद उन्होंने बंगाल में भाजपा की पकड़ मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। भाजपा नेतृत्व ने उन्हें हिंदुत्व और बंगाली सांस्कृतिक पहचान दोनों को साथ लेकर चलने वाले नेता के रूप में स्थापित किया।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दुर्गा पूजा, रविंद्र जयंती और बंगाल की सांस्कृतिक परंपराओं को भाजपा की विचारधारा के साथ जोड़ने की रणनीति ने सुवेंदु अधिकारी को पार्टी नेतृत्व का सबसे भरोसेमंद चेहरा बना दिया।

कौन है सुवेंदु अधिकारी

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