नई दिल्ली, 22 अप्रैल (वेब वार्ता)। राजधानी में दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। द्वारका स्थित एंटी नारकोटिक्स सेल के कार्यालय में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की कार्रवाई के दौरान 52 लाख रुपये की बरामदगी और एक हवलदार की गिरफ्तारी से विभाग में हड़कंप मच गया है।
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने एंटी नारकोटिक्स सेल में तैनात हवलदार अजय को दो लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई एक महिला की शिकायत के आधार पर की गई, जिसने आरोप लगाया था कि उसकी बेटी को मादक पदार्थ तस्करी के मामले में गिरफ्तार करने के बाद पुलिसकर्मी उससे पैसे की मांग कर रहे थे।
मामले के अनुसार, उत्तम नगर क्षेत्र से सांसी समुदाय की एक युवती को कथित तौर पर मादक पदार्थ तस्करी के आरोप में पकड़ा गया था। आरोप है कि उसकी रिहाई या मामले में राहत देने के बदले पुलिसकर्मियों द्वारा उसकी मां से रिश्वत मांगी जा रही थी। पीड़ित पक्ष ने इसकी शिकायत केंद्रीय एजेंसी से की, जिसके बाद जाल बिछाकर कार्रवाई की गई।
हवलदार की गिरफ्तारी के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने एंटी नारकोटिक्स सेल के कार्यालय में तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान वहां से लगभग 50 लाख रुपये अतिरिक्त बरामद किए गए, जिससे कुल बरामदगी 52 लाख रुपये तक पहुंच गई।
घटना के बाद विभागीय कार्रवाई करते हुए सेल के प्रभारी सुभाष चंद्र को लाइन हाजिर कर दिया गया है। द्वारका जिले के पुलिस उपायुक्त कुशल पाल सिंह ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद दिल्ली पुलिस के भीतर सन्नाटा पसरा हुआ है और उच्च अधिकारी मामले की गंभीरता से जांच में जुट गए हैं। वहीं, इस कार्रवाई ने पुलिस तंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर बहस को जन्म दे दिया है।



