जबलपुर, 20 अप्रैल (वेब वार्ता)। आज के दौर में जहां शादियां भव्य आयोजन, महंगे सजावट और दिखावे का प्रतीक बन चुकी हैं, वहीं मध्य प्रदेश से आई एक खबर ने सामाजिक सोच को नई दिशा दी है। जबलपुर की सिटी मजिस्ट्रेट शिवांगी जोशी और सेना के मेजर अनिकेत चतुर्वेदी ने वर्ष 2021 में मात्र 500 रुपये के खर्च में न्यायालय में विवाह कर सादगी की मिसाल पेश की थी।
यह विवाह केवल एक निजी निर्णय नहीं, बल्कि समाज के सामने एक संदेश था कि रिश्तों की मजबूती दिखावे से नहीं, बल्कि आपसी समझ और सादगी से तय होती है। दोनों के इस फैसले की तस्वीरें समय-समय पर सामाजिक माध्यमों पर चर्चा का विषय बनती रही हैं।
शिवांगी जोशी की सफलता की कहानी भी उतनी ही प्रेरणादायक है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे से यांत्रिक अभियंत्रण की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्हें एक बड़ी कंपनी में लगभग 10 लाख रुपये वार्षिक वेतन पर नौकरी मिली। हालांकि, कॉर्पोरेट क्षेत्र में ढाई वर्ष कार्य करने के बाद उन्होंने महसूस किया कि उनका वास्तविक लक्ष्य समाज सेवा है।
इसी उद्देश्य से उन्होंने उच्च वेतन वाली नौकरी छोड़कर प्रशासनिक सेवा की तैयारी शुरू की। इस कठिन निर्णय में उनके परिवार ने पूरा साथ दिया। तैयारी के दौरान उनके पिता ने बैंक की नौकरी से समय से पहले सेवानिवृत्ति लेकर उनका सहयोग किया, जबकि उनके भाई शिवेंदु जोशी, जिन्होंने स्वयं राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण कर उप पुलिस अधीक्षक का पद प्राप्त किया, उनके मार्गदर्शक बने।
कड़ी मेहनत और अनुशासन के बल पर शिवांगी जोशी ने प्रशासनिक सेवा में सफलता हासिल की और वर्तमान में जबलपुर में सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर कार्यरत हैं। उनकी अध्ययन पद्धति भी काफी अनोखी रही, जिसमें वे संक्षिप्त और प्रभावी नोट्स तैयार करती थीं, जिससे उन्हें पूरे विषय को शीघ्रता से दोहराने में सहायता मिलती थी।
विवाह के मामले में भी उन्होंने सादगी को प्राथमिकता दी। पद और प्रतिष्ठा के बावजूद उन्होंने भव्य आयोजन से दूरी बनाते हुए धार के जिला न्यायालय में साधारण तरीके से विवाह किया। इस पूरी प्रक्रिया में केवल 500 रुपये का खर्च आया। शिवांगी जोशी का मानना है कि अनावश्यक खर्च से बचना चाहिए और जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों में सरलता को अपनाना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की पहल समाज में व्याप्त दिखावे की प्रवृत्ति को चुनौती देती है और युवाओं को व्यावहारिक सोच अपनाने के लिए प्रेरित करती है। शिवांगी जोशी और अनिकेत चतुर्वेदी की यह कहानी न केवल प्रेरणा देती है, बल्कि समाज को एक सकारात्मक संदेश भी देती है।



