पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में आदिवासी वोट बैंक पर फोकस, भाजपा-तृणमूल में तेज हुई सियासी जंग

कोलकाता, 16 अप्रैल, 2026 (वेब वार्ता)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी इस बार सत्ता हासिल करने के लक्ष्य के साथ चुनावी रणनीति को धार दे रही है और विशेष रूप से आदिवासी मतदाताओं को साधने पर जोर दे रही है।

झारखंड के नेताओं को सौंपी जिम्मेदारी

भाजपा ने अपनी रणनीति के तहत चंपई सोरेन, अर्जुन मुंडा और बाबूलाल मरांडी समेत कई प्रमुख आदिवासी नेताओं को चुनाव प्रचार में उतारा है। ये नेता सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसभाएं, पदयात्राएं और जनसंपर्क अभियान चलाकर मतदाताओं से संपर्क साध रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, चंपई सोरेन जल्द ही पश्चिम बंगाल के दौरे पर जाएंगे, जबकि अन्य नेताओं के कार्यक्रम भी लगातार तय किए जा रहे हैं।

तृणमूल कांग्रेस की जवाबी तैयारी

वहीं, तृणमूल कांग्रेस भी इस चुनौती को गंभीरता से लेते हुए जवाबी रणनीति पर काम कर रही है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन 15 अप्रैल को बंगाल पहुंचकर ममता बनर्जी के समर्थन में प्रचार कर चुके हैं।

इससे आदिवासी मतदाताओं के बीच राजनीतिक मुकाबला और तेज हो गया है।

पिछले प्रदर्शन और नई चुनौती

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह चुनाव भाजपा के लिए अहम परीक्षा साबित होगा। पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 77 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि इस बार संगठनात्मक मजबूती और सूक्ष्म स्तर की रणनीति के सहारे बेहतर प्रदर्शन का लक्ष्य रखा गया है।

निर्णायक भूमिका में आदिवासी मतदाता

झारखंड से सटे क्षेत्रों में आदिवासी मतदाताओं की संख्या और प्रभाव को देखते हुए सभी दल इस वर्ग को अपने पक्ष में करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ग का झुकाव चुनाव परिणामों को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकता है, जिससे पश्चिम बंगाल का चुनावी मुकाबला और अधिक रोचक हो गया है।

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