कानपुर, डेस्क | वेब वार्ता
कानपुर में गैस सिलिंडरों की किल्लत ने अब धार्मिक आयोजनों को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। नवरात्र के दौरान लगने वाले भंडारों पर इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। कमर्शियल सिलिंडर उपलब्ध नहीं हैं और घरेलू सिलिंडर देने पर भी रोक है, जिससे आयोजकों के सामने प्रसाद बनाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
भंडारों पर संकट, बदल रही व्यवस्थाएं
नवरात्र की अष्टमी और नवमी के अवसर पर शहर में हजारों भंडारे आयोजित होते हैं, लेकिन इस बार गैस संकट के कारण कई आयोजकों को अपनी तैयारियों में बदलाव करना पड़ रहा है। कुछ आयोजक अब श्रद्धालुओं से आटा, चावल या रिफाइंड के बजाय गैस सिलिंडर दान करने की अपील कर रहे हैं।
- भंडारों के लिए सिलिंडर की भारी कमी
- दान में सिलिंडर देने की अपील
- भट्ठी (लकड़ी/कोयला) का विकल्प अपनाने की तैयारी
एक भंडारे में कितनी गैस की जरूरत?
| व्यवस्था | अनुमानित मात्रा |
|---|---|
| सिलिंडर की जरूरत | 4–5 सिलिंडर प्रति भंडारा |
| आटा (पूड़ी के लिए) | 5–10 क्विंटल |
| सब्जी | 5–8 बड़े भगोने |
| चना | 3–4 भगोने |
| हलवा | 2–4 भगोने |
इतनी बड़ी मात्रा में भोजन बनाने के लिए गैस की निरंतर आपूर्ति जरूरी होती है, लेकिन मौजूदा हालात में यह संभव नहीं हो पा रहा है।
गैस किल्लत की वजह क्या?
विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे तनाव और युद्ध की स्थिति के कारण गैस सप्लाई प्रभावित हुई है। इसका असर स्थानीय बाजारों में भी देखने को मिल रहा है, जिससे कमर्शियल सिलिंडरों की उपलब्धता घट गई है।
आयोजकों की बढ़ी परेशानी
आयोजकों का कहना है कि भंडारे श्रद्धा और सेवा का प्रतीक होते हैं, लेकिन गैस संकट के चलते व्यवस्थाएं संभालना मुश्किल हो रहा है। कई स्थानों पर आयोजकों ने वैकल्पिक इंतजाम शुरू कर दिए हैं।
- भट्ठी पर प्रसाद बनाने की तैयारी
- कम पैमाने पर भंडारे आयोजित करने का विचार
- दान व्यवस्था में बदलाव
प्रशासन से उम्मीद
आयोजकों और नागरिकों की मांग है कि प्रशासन इस समस्या पर ध्यान दे और धार्मिक आयोजनों के लिए विशेष व्यवस्था करे, ताकि नवरात्र जैसे महत्वपूर्ण पर्व पर किसी तरह की बाधा न आए।
निष्कर्ष
कानपुर में गैस संकट ने नवरात्र के भंडारों जैसी सामाजिक-धार्मिक परंपराओं को भी प्रभावित कर दिया है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो इसका असर बड़े पैमाने पर देखने को मिल सकता है। ऐसे में प्रशासन और आपूर्ति तंत्र के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।
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