केंद्र की हाई लेवल मीटिंग, सरकार ने कहा- पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक, घबराने की जरूरत नहीं

नई दिल्ली, राष्ट्रीय डेस्क | वेब वार्ता

पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालात के बीच भारत सरकार ने मंगलवार को संसद भवन में हाई लेवल मीटिंग कर स्थिति की समीक्षा की। ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (GoM) की इस बैठक में गृहमंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी शामिल हुए। सरकार ने साफ किया कि देश में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कोई कमी नहीं है और आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।

ऊर्जा आपूर्ति को लेकर सरकार का भरोसा

पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि देश की सभी रिफाइनरी पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, जिससे आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी। साथ ही कॉमर्शियल एलपीजी का आवंटन 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है, ताकि किसी भी संभावित कमी से निपटा जा सके।

स्थिति का प्रमुख विवरण

मुद्दावर्तमान स्थिति
रिफाइनरी संचालनपूरी क्षमता से काम कर रही हैं
ईंधन स्टॉकपर्याप्त उपलब्ध
एलपीजी आवंटन50% तक बढ़ाया गया
भारतीय जहाज20 जहाज, 540 नाविक तैनात

समुद्री मार्गों पर सख्त निगरानी

शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, स्थिति चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन नियंत्रण में है। हाल ही में भारतीय एलपीजी कैरियर जहाज ‘जग वसंत’ और ‘पाइन’ सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर चुके हैं। फारस की खाड़ी में मौजूद भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा के लिए विशेष निगरानी रखी जा रही है।

  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं
  • समुद्री मार्गों पर कड़ी निगरानी
  • भारतीय नाविकों की सुरक्षा प्राथमिकता

कूटनीतिक स्तर पर भी सक्रिय भारत

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और श्रीलंका के विदेश मंत्री से बातचीत कर क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा की है। सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिति को संभालने के लिए सक्रिय कूटनीतिक प्रयास कर रही है।

सर्वदलीय बैठक में होगी विस्तृत चर्चा

केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर राजनीतिक सहमति बनाने के लिए बुधवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है, जिसमें पश्चिम एशिया संकट और उसके भारत पर प्रभाव को लेकर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

निष्कर्ष

पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सरकार घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर सक्रिय नजर आ रही है। जहां एक ओर ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं, वहीं कूटनीतिक प्रयासों के जरिए क्षेत्रीय तनाव को कम करने की कोशिश भी जारी है।


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