मुंबई, डेस्क | वेब वार्ता
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 19 मार्च को भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा। बाजार खुलने के महज एक घंटे के भीतर ही निवेशकों के करीब 7.6 लाख करोड़ रुपये डूब गए। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 438.63 ट्रिलियन रुपये से घटकर 430.99 ट्रिलियन रुपये पर आ गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखने को मिली।
शुरुआती कारोबार में बाजार की स्थिति
| इंडेक्स | स्तर | गिरावट |
|---|---|---|
| सेंसेक्स | 75,155.28 | -1548.85 अंक |
| निफ्टी 50 | 23,319.45 | -458.35 अंक |
सुबह करीब 9:23 बजे बाजार में तेज बिकवाली का माहौल देखने को मिला। सभी प्रमुख सेक्टर—बैंकिंग, आईटी, ऑटो और FMCG—लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।
गिरावट के प्रमुख कारण
| कारण | प्रभाव |
|---|---|
| मिडिल ईस्ट तनाव | ऊर्जा संकट की आशंका |
| कच्चे तेल की कीमत | $111-112 प्रति बैरल |
| FII निकासी | बाजार में बिकवाली बढ़ी |
| फेड का हॉकिश रुख | वैश्विक दबाव |
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा बढ़ गया है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष ने तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर को प्रभावित किया है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें 111-112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह स्थिति महंगाई बढ़ाने वाली साबित हो सकती है।
- एक घंटे में 7.6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान
- रुपया 93.38 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर
- सभी सेक्टरों में भारी गिरावट
HDFC बैंक और वैश्विक संकेतों का असर
HDFC बैंक के पार्ट टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे से निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा, जिससे बैंकिंग सेक्टर में भारी बिकवाली देखने को मिली। बैंक के शेयरों में 8-9 प्रतिशत तक की गिरावट आई, जिससे इसके मार्केट कैप में करीब 1 लाख करोड़ रुपये की कमी आई।
इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ‘हॉकिश’ रुख और ब्याज दरों में बदलाव न करने के संकेतों ने भी वैश्विक बाजारों पर दबाव बनाया, जिसका असर भारतीय बाजार पर साफ नजर आया।
निष्कर्ष
शेयर बाजार में आई यह गिरावट कई घरेलू और वैश्विक कारकों का संयुक्त परिणाम है। बढ़ती तेल कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव, विदेशी निवेश की निकासी और कमजोर वैश्विक संकेतों ने बाजार को प्रभावित किया है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर वैश्विक हालात और सरकारी नीतियों पर टिकी रहेगी।
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