नई दिल्ली, अंतर्राष्ट्रीय डेस्क | वेब वार्ता
भारत और यूरोपीय संघ के बीच सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के उद्देश्य से नई दिल्ली में पहले इंडिया-ईयू फोरम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम को विदेश मंत्रालय और अनंता सेंटर के संयुक्त सहयोग से आयोजित किया गया। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने व्यापार, रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक मुद्दों पर भारत-यूरोप सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
विदेश मंत्री जयशंकर का उद्घाटन संबोधन
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि डॉ. एस. जयशंकर ने फोरम के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक साझेदारी मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने आपसी विश्वास, पारदर्शिता और सहयोग को संबंधों की मजबूती का आधार बताया।
व्यापार और आर्थिक सहयोग पर विशेष सत्र
फोरम में वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने व्यापार, उद्योग और आर्थिक सहभागिता पर केंद्रित एक सत्र को संबोधित किया। उन्होंने भारत और यूरोप के बीच निवेश, आपूर्ति श्रृंखला और तकनीकी सहयोग की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने दोनों पक्षों के बीच मुक्त व्यापार और सतत विकास को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
फोरम में प्रमुख वक्ताओं और सहभागियों का विवरण
| श्रेणी | नाम / विवरण | भूमिका |
|---|---|---|
| मुख्य वक्ता | डॉ. एस. जयशंकर | विदेश मंत्री, भारत |
| विशेष सत्र | पीयूष गोयल | वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री |
| फायरसाइड चैट | निकोस डेंडियास | रक्षा मंत्री, ग्रीस |
| प्रतिभागी | 200+ प्रतिनिधि | नीतिनिर्माता और विशेषज्ञ |
- आयोजन स्थल: नई दिल्ली
- आयोजक: विदेश मंत्रालय और अनंता सेंटर
- प्रतिभागी: भारत और यूरोप के नीति विशेषज्ञ
- मुख्य विषय: व्यापार, सुरक्षा, रणनीतिक सहयोग
ग्रीस के रक्षा मंत्री की विशेष सहभागिता
फोरम में ग्रीस के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री निकोस डेंडियास ने एक विशेष फायरसाइड चैट में भाग लिया। उन्होंने भारत और यूरोपीय देशों के बीच रक्षा सहयोग और सुरक्षा साझेदारी को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा में भारत की भूमिका की सराहना भी की।
भारत-यूरोप सहयोग का बढ़ता महत्व
इस फोरम में भारत और यूरोप के 200 से अधिक नीतिनिर्माताओं, विचारकों और नीति विशेषज्ञों ने भाग लिया। उन्होंने डिजिटल प्रौद्योगिकी, जलवायु परिवर्तन, रक्षा, व्यापार और भू-राजनीतिक चुनौतियों जैसे विषयों पर विस्तृत मंथन किया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मंच दोनों पक्षों के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देगा।
निष्कर्ष
नई दिल्ली में आयोजित पहला इंडिया-ईयू फोरम भारत और यूरोपीय संघ के संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ है। विदेश मंत्री जयशंकर, पीयूष गोयल और अन्य नेताओं के विचारों से यह स्पष्ट होता है कि दोनों पक्ष व्यापार, सुरक्षा और वैश्विक चुनौतियों पर मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आने वाले समय में इस मंच से भारत-यूरोप साझेदारी को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
👉 विदेश नीति, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय खबरों के लिए हमारे व्हाट्सएप्प चैनल को फॉलो करें – Web Varta
ये भी पढ़ें: भारत और मलेशिया के बीच हुए 16 अहम समझौते: विदेश मंत्रालय ने साझा की विस्तृत जानकारी



