देवरिया जेल में पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की मुश्किलें बरकरार, जमानत के बाद भी रिहाई पर संशय

देवरिया, ममता तिवारी | वेब वार्ता

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिला कारागार में बंद पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। 19 जनवरी 2026 को जनपद न्यायाधीश धनेंद्र प्रताप सिंह की अदालत से जमानत मिलने के बावजूद वे अब तक जेल से रिहा नहीं हो सके हैं। तकनीकी अड़चनों के चलते उनकी रिहाई अटकी हुई है, जबकि बाहर निकलते ही पुनः गिरफ्तारी की आशंका ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है।

जमानत के बाद भी क्यों नहीं मिली रिहाई?

सूत्रों के अनुसार, जमानत आदेश के बावजूद प्रक्रियागत और दस्तावेजी कारणों से रिहाई की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। शनिवार को रिहाई की संभावना थी, लेकिन तकनीकी कारणों के चलते यह संभव नहीं हो पाया।

प्रशासनिक स्तर पर हो रही देरी को लेकर परिजनों और अधिवक्ताओं में असंतोष भी देखा जा रहा है।

पुनः गिरफ्तारी की आशंका से बढ़ी चिंता

सूत्रों का कहना है कि लखनऊ पुलिस का वज्र वाहन पिछले कुछ दिनों से देवरिया में मौजूद है। स्टेशन रोड स्थित एक होटल के सामने खड़ी पुलिस गाड़ी को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि रिहाई के तुरंत बाद अमिताभ ठाकुर को दोबारा गिरफ्तार किया जा सकता है।

इस स्थिति ने उनके परिजनों और समर्थकों की चिंता और बढ़ा दी है।

मामले से जुड़ी प्रमुख जानकारी

विवरणजानकारी
जेल में निरुद्ध होने की तिथि10 दिसंबर 2025
जमानत आदेश19 जनवरी 2026
मामले का स्वरूपऔद्योगिक प्लॉट आवंटन में धोखाधड़ी
प्रस्तावित रिहाईफरवरी 2026

स्वास्थ्य समस्याओं से भी जूझ रहे अमिताभ ठाकुर

जेल में रहते हुए अमिताभ ठाकुर को हार्ट अटैक जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा उन्हें फर्जी टेलीफोन कॉल के माध्यम से मानसिक रूप से परेशान किए जाने की शिकायत भी सामने आई है।

स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बावजूद उनकी रिहाई में हो रही देरी पर सवाल उठ रहे हैं।

अधिवक्ता ने दी जानकारी

अमिताभ ठाकुर के अधिवक्ता प्रवीण द्विवेदी ने बताया कि हाल ही में उनके पिता को एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर चोट लगने की झूठी सूचना दी थी। जांच में यह सूचना पूरी तरह गलत पाई गई।

अधिवक्ता ने यह भी कहा कि लखनऊ पुलिस की मौजूदगी संभावित गिरफ्तारी की ओर इशारा कर रही है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।

  • 19 जनवरी को मिली जमानत
  • तकनीकी कारणों से रिहाई लंबित
  • लखनऊ पुलिस की मौजूदगी से बढ़ी आशंका
  • स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे

निष्कर्ष

पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को जमानत मिलने के बावजूद जेल से रिहाई न होना न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है। तकनीकी अड़चनें, स्वास्थ्य समस्याएं और पुनः गिरफ्तारी की आशंका के बीच उनकी स्थिति लगातार जटिल होती जा रही है। अब सभी की नजरें प्रशासन और न्यायालय के अगले कदम पर टिकी हैं।

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