ईरान की ओर बढ़ा USS अब्राहम लिंकन, अकेले पूरी सेना के बराबर तबाही मचाने वाला अमेरिकी युद्ध समूह

वाशिंगटन/मिडिल ईस्ट, डिफेंस डेस्क | वेब वार्ता

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी नौसेना का सबसे शक्तिशाली युद्ध समूह USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तेजी से मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहा है। पेंटागन ने इस युद्ध समूह को दक्षिण चीन सागर से रीडायरेक्ट कर दिया है। सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्ट्राइक ग्रुप अकेले इतनी सैन्य क्षमता रखता है, जो कई देशों की पूरी सेना के बराबर मानी जाती है।

क्या है USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप?

यह कैरियर स्ट्राइक ग्रुप-3 है, जिसका मुख्य जहाज USS अब्राहम लिंकन (CVN-72) है। यह निमित्ज़ क्लास का न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर है, जो बिना ईंधन भरे वर्षों तक समुद्र में ऑपरेशन कर सकता है। इसका वजन एक लाख टन से अधिक है और इस पर करीब 5,000 से 6,000 नौसैनिक और सैनिक तैनात रहते हैं।

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कितनी बड़ी है इस युद्ध समूह की ताकत?

USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में केवल एक एयरक्राफ्ट कैरियर ही नहीं, बल्कि पूरा चलता-फिरता युद्ध बेड़ा शामिल है। इसमें आर्लिघ बर्क-क्लास के 3 से 4 गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर, 1 से 2 न्यूक्लियर अटैक सबमरीन और ईंधन व गोला-बारूद ले जाने वाले सपोर्ट शिप्स भी शामिल हैं। कुल मिलाकर इस पूरे बेड़े में 7,000 से 8,000 सैनिक और मरीन तैनात रहते हैं।

  • न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन
  • 3–4 गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर
  • 1–2 न्यूक्लियर अटैक सबमरीन
  • सपोर्ट शिप्स और हजारों सैनिक

कैरियर पर तैनात लड़ाकू विमान

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इस कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में कैरियर एयर विंग-9 तैनात है, जिसमें 65 से 70 अत्याधुनिक विमान शामिल हैं। यह एयर विंग दिन-रात 150 से ज्यादा सॉर्टी उड़ानें भरने में सक्षम है। इसमें सुपर हॉर्नेट, F-35C स्टील्थ फाइटर जेट, E-2D हॉकआई सर्विलांस विमान, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के लिए EA-18G ग्राउलर और MH-60 सीहॉक हेलीकॉप्टर शामिल हैं।

सबसे घातक हथियार और क्षमताएं

इस युद्ध समूह की सबसे बड़ी ताकत इसके हथियार हैं। इसमें सैकड़ों टोमाहॉक क्रूज मिसाइलें तैनात हैं, जो 1,000 किलोमीटर से अधिक दूरी से दुश्मन के एयरबेस, नौसेना ठिकानों, तेल प्रतिष्ठानों और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना सकती हैं। इसके अलावा एयर-टू-एयर, एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलें और अत्याधुनिक बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी मौजूद हैं।

ईरान की ओर क्यों भेजा गया यह युद्ध समूह?

अमेरिका और ईरान के बीच हाल के दिनों में तनाव काफी बढ़ गया है। अमेरिका अपने हितों की सुरक्षा, इजरायल के समर्थन और ईरान पर रणनीतिक दबाव बनाने के लिए इस स्ट्राइक ग्रुप को मिडिल ईस्ट भेज रहा है। यह समूह पहले दक्षिण चीन सागर में नियमित ऑपरेशन कर रहा था, लेकिन अब इसे तेजी से मध्य पूर्व की ओर मोड़ा गया है।

भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर?

ईरान क्षेत्र में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है, जिसका सीधा असर भारत जैसी तेल आयातक अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि USS अब्राहम लिंकन जैसे युद्ध समूह की मौजूदगी क्षेत्र में संतुलन भी ला सकती है और हालात बिगड़ने पर बड़े सैन्य संघर्ष का कारण भी बन सकती है। भारत सरकार स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है।

निष्कर्ष: चलता-फिरता युद्ध अड्डा

USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को दुनिया के सबसे खतरनाक और शक्तिशाली सैन्य बेड़ों में गिना जाता है। इसकी तैनाती यह संकेत देती है कि अमेरिका किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। आने वाले दिनों में यह युद्ध समूह मिडिल ईस्ट की भू-राजनीति में अहम भूमिका निभा सकता है।

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