पीतमपुरा में कुतों का आतंक, तीन साल के बच्चे पर किया हमला

-थोड़ी देर और हो जाती तो हो सकती थी अनहोनी

नई दिल्ली, (वेब वार्ता)। दिल्ली में दिल्ली नगर निगम द्वारा आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के दावे निगम मुख्यालय और जोनल बैठकों में अनेकों बार किए गए लेकिन इसके बाद भी कुत्तों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। ऐसा ही एक ताजा मामला रोहिणी के पीतमपुरा इलाके से आया है। बता दें कि बुधवार सुबह करीब सात बजे तीन साल के एक बच्चे पर गली के करीब चार पांच कुत्तों ने हमला कर दिया। इस दौरान बच्चे के सिर पर काफी जख्म आए हैं।

पीड़ित बच्चे के पिता विष्णु ने बताया कि उनकी पत्नी सुबह नजदीक की दुकान से दूध आदि खाद्य सामग्री लेने गई थी, इस दौरान बच्चा भी अपनी मां के साथ था। इसी बीच वह कुछ समय ही गोदी से उतरा था कि वह कुत्तों के आतंक का शिकार हो गया। यदि समय रहते कुत्तों को नहीं भगाया जाता तो अनहोनी घटना हो सकती थी। बता दें कि घायल बच्चे को बाबा साहेब अम्बेडकर अस्पताल ले जाया गया। परिजनों ने बताया कि आवारा कुत्तों की गंभीर समस्या को लेकर सभी को पता है लेकिन निगम प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया है।

महापौर भी आवारा कुत्तों से नहीं दिला पाई थी निजात

बता दें कि एनडीएमसी इलाके में कुत्तों के काटने से एक बच्ची की मौत हो गई थी तब तत्कालीन महापौर डॉ शैली ओबरॉय पीड़ित परिवार से मिली थी। इस दौरान उन्होंने कहा था कि दिल्ली को आवारा जानवरों की समस्या से अधिकारी निजात दिलाएंगे लेकिन इस दिशा में कुछ खास नहीं हो पाया है। वहीं, महापौर ने कुत्तों के आतंक से जान गंवाने वाली बच्ची के परिजनों को सांत्वना दी। बता दें कि तुगलक लेन स्थित धोबी घाट पहुंचकर मृतक के परिजनों से मुलाकात कर सांत्वना दी और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। महापौर शैली ओबरॉय ने कहा कि यह काफी दुख की घड़ी है। एक मां की गोद सुनी पड़ गई है। हम उस मां को उसकी बच्ची तो नहीं लौटा सकते हैं, लेकिन दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल से इस मामले में बात करके, जितनी अधिक हो सकेगी, बच्ची के परिवार की मदद करने की कोशिश करेंगे।

दिल्ली में कुत्तों की बढ़ती संख्या पर गंभीर हैं एमसीडी

साथ ही यह भी बता दें कि महापौर शैली ओबरॉय ने कहा था कि दिल्ली में कुत्तों की बढ़ती संख्या और कुत्तों के काटने के मामले पर दिल्ली नगर निगम गंभीर हैं और इसी दिशा में एमसीडी जल्द ही इनकी गणना शुरू कर सकती है। ताकि भविष्य में योजना बनाई जाए और इनकी संख्या को नियंत्रित किया जा सके।

दिल्ली में पिछले कुछ समय से कुत्तों के काटने के मामले तेजी से बढ़े

वहीं, जानकारी के अनुसार दिल्ली में पिछले कुछ समय से कुत्तों के काटने के मामले तेजी से बढ़े है। इनमें स्ट्रीट डॉग के साथ पालतू भी शामिल है। एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स 2001 के अनुसार किसी भी शहर में कुत्तों की कुल संख्या का 80 प्रतिशत की नसबंदी जरूरी है। दिल्ली में कुत्तों की संख्या का सही आकलन एजेंसी के पास नहीं है, तो सरकार इस लक्ष्य को कैसे पूरा कर सकती है। बताया जाता है कि निगम के पांडव नगर वार्ड, नरेला वार्ड, बुराड़ी वार्ड, बवाना वार्ड, अलीपुर वार्ड में कुत्तों का आतंक ज्यादा है और अस्पतालों में टीकाकरण के लिए भी लंबी लाइन बताई जाती है।

एनिमल बर्थ कंट्रोल के अधिकारियों को कुत्तों की गणना करानी होगी

एमसीडी अधिकारियों के अनुसार साल 2016 में दक्षिणी, पश्चिमी, सेंट्रल और नजफगढ़ जोन में कुत्तों की गणना कराई गई थी। उस समय इन चारों ज़ोन में कुत्तों की संख्या 1, 89, 285 पाई गई थी। जिनमें से 41.8 प्रतिशत नर कुत्ते, जबकि 29.18 फीसदी मादा कुत्तों नसबंदी भी की गई थी। वहीं बीते 5 सालों में कुत्तों के काटने से 36 लोगों की जान जा चुकी है। कुत्तों के काटने का मामला लगातार बढ़ने के बाद एमसीडी ने एक बार फिर इनकी गणना की योजना बनाई है। कुत्तों की सही संख्या का विवरण नहीं होने की वजह से निगम के अधिकारी मान रहे हैं कि कुत्तों की शत-प्रतिशत नसबंदी कर पाना संभव नहीं है। इसके लिए नगर निगम व वेटनरी विभाग और एनिमल बर्थ कंट्रोल के अधिकारियों को कुत्तों की गणना करानी होगी।

उपराज्यपाल ने भी माना कि कुत्तों के काटने की समस्या गंभीर : गोयल

बता दें कि पूर्व केन्द्रीय मंत्री विजय गोयल ने दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को कुत्तों के काटने की समस्या को लेकर वसंत कुंज क्षेत्र में पशु अस्पताल एवं नसबंदी केंद्र खोलने के लिए बधाई दी थी। गोयल ने कहा कि उनका कुत्तों के काटने की समस्या के आन्दोलन का यह नतीजा है कि उपराज्यपाल यह मान रहें हैं कि दिल्ली में कुत्तों का आतंक है। गोयल कुत्तों के काटने की समस्या को लेकर 15 दिन पहले उपराज्यपाल से मिले थे। उपराज्यपाल ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि वे इस मसले पर कुछ अवश्य करेंगे। गोयल ने कहा कि उपराज्यपाल का प्रयास प्रशंसनीय है, पर यह केवल एक मूंगफली के समान है। गोयल ने कहा कि एक अकेले नसबंदी केंद्र से कुछ नहीं होगा और यह केंद्र भी पालतू कुत्तों का ही ज्यादा ध्यान रखेगा।

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