Saturday, February 7, 2026
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बलरामपुर: स्वास्थ्य विभाग में ₹20 हजार घूसकांड की जांच ठंडे बस्ते में, लिपिक की दबंगई से बढ़ी नाराजगी

बलरामपुर, कमर खान | वेब वार्ता

जनपद बलरामपुर के स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला सुर्खियों में है। अनुसूचित जाति वर्ग के कर्मचारी से एरियर भुगतान के नाम पर ₹20,000 की अवैध वसूली का आरोप लगने के बावजूद विभागीय जांच अब तक ठंडे बस्ते में है। वीडियो वायरल होने और जनप्रतिनिधियों के बार-बार शिकायत करने के बावजूद कार्रवाई न होना विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है।

एरियर भुगतान के नाम पर मांगी गई थी रिश्वत

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सफाई कर्मी श्री सनी कुमार से संबंधित लिपिक सौरभ दुबे पर ₹20,000 की रिश्वत मांगने का आरोप है। इस मामले का वीडियो सार्वजनिक होने के बाद तत्कालीन उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने लिपिक को तत्काल निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दिए थे। हालांकि जांच पूरी किए बिना ही निलंबन आदेश पारित किए जाने के चलते न्यायालय ने लिपिक को बहाल करते हुए नियमानुसार जांच कराने का निर्देश दिया था।

जांच ठप, लिपिक का बढ़ा मनोबल

अदालत के निर्देशों के बावजूद अपर निदेशक एवं उपनिदेशक, देवीपाटन मंडल (गोंडा) द्वारा अब तक कोई प्रभावी जांच नहीं कराई गई है। यह विभागीय उदासीनता साफ तौर पर दर्शाती है कि भ्रष्टाचार के मामलों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, संबंधित लिपिक को औपचारिक स्थानांतरण के बाद भी चार्ज देने में महीनों की देरी की गई और जब चार्ज मिला, तो जानबूझकर कर्मचारियों की सेवा पुस्तिका (Service Book) नहीं सौंपी गई।

  • ₹20,000 रिश्वत मांगने का वीडियो हुआ था वायरल।
  • तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री ने दिए थे जांच के आदेश।
  • जांच लंबित रहने से आरोपी लिपिक का बढ़ा मनोबल।

निगरानी समिति की बैठक में भी उठा मामला

यह मामला माननीय सांसद गोण्डा एवं निगरानी समिति अध्यक्ष कीर्तिवर्धन सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी उठाया गया। समिति ने स्पष्ट कहा कि न्यायालय ने लिपिक को उसी स्थान पर रखने का कोई आदेश नहीं दिया है, इसलिए स्थानांतरण आवश्यक है। इसके बावजूद केवल औपचारिक कार्रवाई कर मामले को दबाने का प्रयास किया गया। भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी डी.पी. सिंह बैस ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में अवैध वसूली की प्रवृत्ति व्यापक रूप से फैली है और इसी कारण कठोर कार्रवाई से जानबूझकर बचा जा रहा है।

स्वतंत्र जांच और FIR की मांग

डी.पी. सिंह बैस ने मांग की है कि सेवा पुस्तिका न सौंपने के मामले में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज की जाए। साथ ही उन्होंने स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर लिपिक और उसे संरक्षण देने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने सांसद एवं निगरानी समिति से हस्तक्षेप कर न्यायोचित कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

निष्कर्ष: विभागीय शिथिलता से बढ़ रहा भ्रष्टाचार

वीडियो प्रमाण और राजनीतिक स्तर पर बार-बार उठाए जाने के बावजूद जांच आगे न बढ़ना स्वास्थ्य विभाग में व्यवस्थित भ्रष्टाचार की ओर संकेत करता है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला केवल विभागीय नहीं, बल्कि प्रशासनिक विश्वसनीयता पर भी गहरा सवाल बन जाएगा।

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