राजस्थान दिवस की पूर्व संध्या पर CM भजनलाल शर्मा ने गोविंददेव जी मंदिर में की महाआरती

जयपुर, डेस्क | वेब वार्ता

राजस्थान दिवस की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर स्थित श्री गोविंददेव जी मंदिर में महाआरती में भाग लिया। उन्होंने विधिवत मंत्रोच्चार के साथ सपत्नीक पूजा-अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली और समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

महाआरती में शामिल हुए मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने श्री गोविंददेव जी के दर्शन कर महाआरती में भाग लिया और श्रद्धालुओं का अभिवादन किया। मंदिर के महंत ने उन्हें दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मानित किया। इस दौरान संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल, विधायक गोपाल शर्मा, बालमुकुंदाचार्य सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारीगण भी उपस्थित रहे।

राजस्थान दिवस: कार्यक्रम और आयोजन

कार्यक्रमविवरण
तारीख19 मार्च (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा)
स्थानप्रदेशभर के जिला मुख्यालय
मुख्य गतिविधियांधार्मिक, सांस्कृतिक व जनकल्याणकारी कार्यक्रम
विशेष आयोजनमंदिर सजावट, दीप प्रज्ज्वलन, भजन संध्या

राज्य सरकार द्वारा इस वर्ष भी राजस्थान दिवस को भारतीय पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (19 मार्च) को मनाया जा रहा है। प्रदेशभर में विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

  • प्रदेश के सभी राजकीय मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना
  • दीप प्रज्ज्वलन और भजन संध्या का आयोजन
  • सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजेगा राजस्थान दिवस

भारतीय पंचांग के अनुसार मनाया जा रहा राजस्थान दिवस

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर पिछले वर्ष से राजस्थान दिवस को अंग्रेजी कैलेंडर के बजाय भारतीय पंचांग के अनुसार मनाने का निर्णय लिया गया। इसका उद्देश्य भारतीय परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना है।

आस्था और संस्कृति का संगम

राजस्थान दिवस के अवसर पर आयोजित इन कार्यक्रमों के जरिए प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को प्रदर्शित किया जा रहा है। मंदिरों में विशेष सजावट और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से आस्था और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है।

निष्कर्ष

राजस्थान दिवस के मौके पर आयोजित यह भव्य आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक आस्था को मजबूत करने का प्रयास है। मुख्यमंत्री की पहल से पारंपरिक मूल्यों को नई पहचान मिल रही है और समाज में सांस्कृतिक जागरूकता भी बढ़ रही है।


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