भोपाल, सिटी डेस्क | वेब वार्ता/ अकबर खान
भोपाल के जिंसी क्षेत्र स्थित स्लॉटर हाउस में गोमांस प्रकरण सामने आने के बाद मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। स्लॉटर हाउस को सील किए जाने और वेटरनरी डॉक्टर सहित कर्मचारियों के निलंबन के बावजूद अब सवाल नगर निगम के उन अधिकारियों पर उठ रहे हैं, जिनकी जिम्मेदारी लीज विस्तार, मेंटेनेंस और निरीक्षण से जुड़ी थी। कार्रवाई निचले स्तर तक सीमित रहने से निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
लीज विस्तार में इंजीनियर उदित गर्ग की भूमिका पर सवाल
सूत्रों के अनुसार, स्लॉटर हाउस संचालन से जुड़े सिलेंडर सिस्टम की लीज बढ़ाने की जिम्मेदारी नगर निगम के इंजीनियर उदित गर्ग के पास थी। आरोप है कि लीज विस्तार के दौरान तकनीकी खामियों और संचालन से जुड़ी गंभीर अनियमितताओं को नजरअंदाज किया गया। यह भी कहा जा रहा है कि स्लॉटर हाउस पहले से विवादों में रहा है, इसके बावजूद बिना सख्त शर्तों के लीज को आगे बढ़ाया गया, जिससे अवैध गतिविधियों को अप्रत्यक्ष संरक्षण मिला।
मेंटेनेंस की जिम्मेदारी और सवालों के घेरे में सब-इंजीनियर
स्लॉटर हाउस में सिलेंडर और अन्य तकनीकी ढांचे के रखरखाव की जिम्मेदारी सब-इंजीनियर राजेंद्र त्रिवेदी के पास बताई जा रही है। इसके बावजूद नियमित मेंटेनेंस रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। तकनीकी खामियों पर कोई ठोस आपत्ति दर्ज नहीं हुई और लंबे समय तक व्यवस्था को “सामान्य” बताया जाता रहा। आलोचकों का कहना है कि यदि मेंटेनेंस ईमानदारी से किया जाता, तो इतनी बड़ी गड़बड़ी समय रहते सामने आ सकती थी।
- मेंटेनेंस रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई
- तकनीकी खामियों पर आपत्ति दर्ज नहीं
- लंबे समय तक व्यवस्था को सामान्य बताया गया
उद्घाटन से निरीक्षण तक औपचारिकता का आरोप
मामले को और गंभीर बनाता है यह तथ्य कि स्लॉटर हाउस के सिलेंडर सिस्टम के उद्घाटन के दौरान महापौर मालती राय के साथ सब-इंजीनियर राजेंद्र त्रिवेदी ने निरीक्षण कराया था। उस समय व्यवस्था को पूरी तरह ठीक बताया गया, लेकिन कुछ ही समय बाद वही प्रणाली विवाद और सीलिंग का कारण बन गई। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या निरीक्षण सिर्फ औपचारिकता भर था?
कार्रवाई सिर्फ निचले कर्मचारियों तक सीमित?
गोमांस की पुष्टि के बाद वेटरनरी डॉक्टर और कर्मचारियों पर तो तत्काल कार्रवाई कर दी गई, लेकिन लीज बढ़ाने और मेंटेनेंस से जुड़े अधिकारियों पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। हिंदू संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों का कहना है कि यदि इतने बड़े स्तर पर अवैध गतिविधियां चल रही थीं, तो इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को कैसे नहीं हुई?
बड़ा नेटवर्क या सिर्फ छोटे मोहरे?
इस पूरे प्रकरण में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या निलंबित किए गए डॉक्टर और कर्मचारी सिर्फ मोहरे थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बिना अधिकारियों की जानकारी और सहमति के ऐसा नेटवर्क चल पाना लगभग असंभव है। जनता जानना चाहती है कि आखिर इस पूरे नेटवर्क में और कितने अफसर शामिल हैं।
निष्पक्ष जांच की बढ़ती मांग
अब मांग तेज हो रही है कि इंजीनियर उदित गर्ग की लीज विस्तार में भूमिका और सब-इंजीनियर राजेंद्र त्रिवेदी की मेंटेनेंस व निरीक्षण से जुड़ी भूमिका की अलग-अलग विभागीय और विजिलेंस जांच कराई जाए। लोगों का कहना है कि जब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह सवाल बना रहेगा कि कार्रवाई सिर्फ दिखावे की है।
निष्कर्ष: जवाबदेही तय किए बिना अधूरी कार्रवाई
भोपाल स्लॉटर हाउस मामला अब केवल गोमांस प्रकरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह नगर निगम की कार्यशैली और जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न बन चुका है। निचले स्तर पर कार्रवाई के साथ-साथ यदि जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह संदेश जाएगा कि असली जिम्मेदार आज भी सिस्टम की आड़ में सुरक्षित हैं।




