पुणे ट्रेन हादसा, मुंबई सड़क दुर्घटना और लॉ कॉलेज रैगिंग केस की बड़ी खबरें

पुणे/मुंबई, 28 अप्रैल (वेब वार्ता)। महाराष्ट्र में मंगलवार को अलग-अलग घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी। पुणे रेलवे स्टेशन पर वंदे भारत एक्सप्रेस के पटरी से उतरने, मुंबई में सड़क हादसे में तीन लोगों की मौत और पुणे के एक प्रतिष्ठित विधि महाविद्यालय में रैगिंग के मामले ने प्रशासन को सक्रिय कर दिया है।

पुणे रेलवे स्टेशन में प्रवेश के दौरान मुंबई-सोलापुर वंदे भारत एक्सप्रेस अचानक पटरी से उतर गई। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस घटना में किसी भी यात्री के घायल होने की सूचना नहीं है और सभी यात्री सुरक्षित हैं। ट्रेन को दोबारा पटरी पर लाने का कार्य जारी है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, यह घटना स्टेशन परिसर में धीमी गति के दौरान हुई, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

वहीं, मुंबई के मरीन ड्राइव क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसे में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, तेज रफ्तार मोटरसाइकिल ने एक पैदल यात्री को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक सवार और पैदल यात्री सहित तीन लोगों की जान चली गई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोग मदद के लिए मौके पर पहुंचे।

सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शवों को कब्जे में लिया और जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में तेज रफ्तार और लापरवाही को हादसे का मुख्य कारण माना जा रहा है।

इसी बीच, पुणे के एक प्रतिष्ठित विधि महाविद्यालय में रैगिंग का गंभीर मामला सामने आया है। पांच वरिष्ठ छात्रों के खिलाफ एक कनिष्ठ छात्र को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। डेक्कन पुलिस थाने में महाराष्ट्र रैगिंग निषेध कानून के तहत 25 अप्रैल को प्राथमिकी दर्ज की गई।

शिकायतकर्ता, जो प्रथम वर्ष का विधि छात्र है, ने आरोप लगाया कि छात्रावास में उसे लगातार मानसिक उत्पीड़न और धमकियों का सामना करना पड़ा। उसने बताया कि आरोपियों ने उसे कमरे में बंद किया, दरवाजे पर अंडे फेंके और गुटखा थूककर परेशान किया।

बताया गया कि पीड़ित ने पहले कॉलेज प्रशासन से शिकायत की थी, लेकिन संतोषजनक कार्रवाई न होने पर उसने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की रैगिंग विरोधी प्रणाली के माध्यम से मामला आगे बढ़ाया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच जारी है और तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। तीनों घटनाओं ने एक बार फिर सुरक्षा, यातायात अनुशासन और शैक्षणिक संस्थानों में अनुशासन की आवश्यकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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