महाराष्ट्र में मतदाता सूची पुनरीक्षण: 66% प्री-मैपिंग पूरी, शहरी जिलों में धीमी रफ्तार

मुंबई, 04 मई (वेब वार्ता)। महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत प्री-मैपिंग का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब तक राज्य में कुल 66.42 प्रतिशत कार्य पूरा किया जा चुका है। अधिकारियों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर प्रगति दर्ज की गई है, जबकि शहरी जिलों में यह प्रक्रिया अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है।

सबसे अधिक प्रगति गढ़चिरौली जिले में दर्ज की गई है, जहां 90.51 प्रतिशत प्री-मैपिंग कार्य पूरा हो चुका है। इसके विपरीत, मुंबई उपनगरीय, पुणे और ठाणे जैसे प्रमुख शहरी जिलों में 50 प्रतिशत से भी कम प्रगति देखी गई है, जो प्रशासन के लिए चिंता का विषय है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 14 जिलों में 80 से 90 प्रतिशत के बीच कार्य पूरा हो चुका है, जबकि 13 जिलों में 70 से 80 प्रतिशत तक प्रगति दर्ज की गई है। वहीं मुंबई (51.40 प्रतिशत), नागपुर (55.57 प्रतिशत), रायगढ़ (57.80 प्रतिशत) और पालघर (59.28 प्रतिशत) में काम अपेक्षाकृत धीमा है।

अधिकारियों का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में जनसंख्या के पलायन और तेजी से बढ़ती आबादी के कारण बूथों की संख्या में वृद्धि हुई है, जिससे प्री-एसआईआर कार्य प्रभावित हो रहा है। जिन जिलों में 80 से 90 प्रतिशत तक प्रगति हुई है, उनमें वाशिम, लातूर, सांगली, अमरावती, नंदुरबार, नांदेड़, गोंदिया, धाराशिव, परभणी, बीड, बुलढाणा, सिंधुदुर्ग, रत्नागिरी और हिंगोली शामिल हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के 9.88 करोड़ मतदाताओं में से अब तक लगभग 6.56 करोड़ मतदाताओं का मैपिंग कार्य पूरा किया जा चुका है। इस प्रक्रिया के तहत ब्लॉक स्तर के अधिकारी वर्तमान मतदाता सूची का मिलान वर्ष 2002 में तैयार सूची से कर रहे हैं।

निर्देशों के अनुसार, जांच के लिए मौजूदा मतदाताओं का नाम 2002 की सूची में होना अनिवार्य है। फिलहाल यह केवल दस्तावेजी मिलान का चरण है और भौतिक सत्यापन अभी शुरू नहीं किया गया है। जिन नए मतदाताओं के नाम 2002 की सूची में नहीं हैं, उन्हें अपने माता-पिता के नाम उस सूची में होने का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि एसआईआर के भौतिक चरण के लिए विस्तृत कार्यक्रम अभी जारी नहीं किया गया है। तब तक प्री-मैपिंग का कार्य जारी रहेगा। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाताओं को इस प्रक्रिया में न्यूनतम असुविधा हो और पारदर्शिता बनी रहे।

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