BMC Polls: ‘राज ठाकरे ने बीएमसी चुनावों में अपनी हार स्वीकार कर ली’, भाजपा नेता आशीष शेलार का दावा

मुंबई, राजनीतिक डेस्क | वेब वार्ता

BMC Polls:  महाराष्ट्र में गुरुवार को जारी नगर निकाय चुनावों के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इसी क्रम में महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और भाजपा नेता आशीष शेलार ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) प्रमुख राज ठाकरे ने बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनावों में अपनी पार्टी की हार पहले ही स्वीकार कर ली है। शेलार ने आरोप लगाया कि राज ठाकरे अब इस संभावित हार की जिम्मेदारी से बचने के लिए राज्य चुनाव आयोग पर निराधार आरोप लगा रहे हैं।

पीएडीयू के इस्तेमाल पर उठे सवाल

बीएमसी चुनावों के दौरान इस बार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में तकनीकी खराबी की स्थिति से निपटने के लिए प्रिंटिंग ऑक्सिलरी डिस्प्ले यूनिट (पीएडीयू) का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसको लेकर एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने आपत्ति जताई है। दोनों नेताओं का कहना है कि पीएडीयू के इस्तेमाल से चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।

बीएमसी आयुक्त ने क्या दी सफाई

बीएमसी आयुक्त भूषण गगरानी ने पीएडीयू को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा था कि ये यूनिट केवल बैकअप के तौर पर रखी गई हैं। उनका उपयोग सिर्फ आपात स्थिति में किया जाएगा, जब ईवीएम में कोई तकनीकी खराबी सामने आएगी। अन्य ईवीएम यूनिट की तरह ही ये भी रिटर्निंग अधिकारियों की निगरानी में रहेंगी और नियमित मतदान प्रक्रिया में इनका कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।

हार की जिम्मेदारी से बच रहे हैं राज ठाकरे: शेलार

पत्रकारों से बातचीत में आशीष शेलार ने कहा कि राज ठाकरे अपनी पार्टी के कमजोर प्रदर्शन की जिम्मेदारी लेने के बजाय राज्य चुनाव आयोग पर दोष मढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा, “राज ठाकरे पहले ही बीएमसी चुनावों में अपनी हार स्वीकार कर चुके हैं। अब वे बहाने बनाकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं।” शेलार ने मतदाताओं से अपील की कि वे बड़ी संख्या में मतदान कर विकास और प्रगति के पक्ष में वोट दें।

मराठी पहचान चुनावी मुद्दा नहीं: शेलार

ठाकरे परिवार के चचेरे भाइयों द्वारा मराठी पहचान को चुनावी मुद्दा बनाए जाने के सवाल पर भाजपा नेता ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। शेलार ने कहा कि यह चुनाव मराठी बनाम गैर-मराठी का नहीं, बल्कि मुंबई के विकास और प्रगतिशील नीतियों का है। उन्होंने कहा कि असली सवाल यह है कि आने वाले वर्षों में मुंबई का विकास कौन करेगा और किस तरह की नीतियों के साथ शहर को आगे बढ़ाया जाएगा।

निष्कर्ष: सियासी आरोपों के बीच मतदान जारी

बीएमसी चुनावों के बीच नेताओं के तीखे बयानों से सियासी माहौल गर्माया हुआ है। जहां एक ओर विपक्ष चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, वहीं भाजपा इसे हार की आशंका से जोड़ा बता रही है। इन सबके बीच मुंबई की जनता के फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं, जो तय करेगा कि देश की सबसे अमीर नगर निगम की कमान आगे किसके हाथ में होगी।

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