नई दिल्ली, 12 मई। पूर्वी दिल्ली के न्यू अशोक नगर इलाके में सीलिंग की प्रस्तावित कार्रवाई से सैकड़ों दुकानदारों में भय और अनिश्चितता का माहौल है। डीडीए की ओर से जारी नोटिस के बाद दुकानदारों ने अपनी दुकानों को सील होने से बचाने के लिए शटर हटाकर उनकी जगह ईंटों की दीवारें खड़ी करनी शुरू कर दी हैं।
जानकारी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित मॉनिटरिंग कमेटी के निर्देश पर डीडीए ने न्यू अशोक नगर क्षेत्र में कई दुकानों को नोटिस जारी किए हैं। आरोप है कि रिहायशी इलाकों में बिना अनुमति व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। डीडीए, नगर निगम और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम मंगलवार को इलाके में सीलिंग अभियान चलाने की तैयारी में है।
नोटिस मिलने के बाद सोमवार को न्यू अशोक नगर मेट्रो स्टेशन रोड और चिल्ला सरोदा बांगर गांव क्षेत्र में दिनभर दुकानों के शटर हटाने और उनकी जगह दीवारें चुनवाने का काम चलता रहा। कई दुकानदारों ने दीवारों पर प्लास्टर करवाकर उन्हें भवन के रंग में रंगवा दिया, ताकि वे सामान्य रिहायशी हिस्से जैसे दिखाई दें।
इलाके में रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी सैकड़ों दुकानें संचालित होती हैं, जिन पर हजारों लोगों की आजीविका निर्भर है। सीलिंग की आशंका के चलते अधिकांश दुकानदारों ने सामान हटाना शुरू कर दिया है। कुछ दुकानों को पूरी तरह बंद कर दिया गया, जबकि एक दुकान में लगा एटीएम तक दीवार बनाकर बंद कर दिया गया।
डीडीए अधिकारियों का कहना है कि मॉनिटरिंग कमेटी के निर्देश पर उन स्थानों की पहचान की गई है, जहां रिहायशी भवनों में अवैध रूप से व्यापारिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इसके आधार पर नगर निगम को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। निगम अधिकारियों के अनुसार रिहायशी क्षेत्रों में बिना अनुमति व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित करना नियमों के विरुद्ध है और शिकायत मिलने पर कार्रवाई करना आवश्यक है।
दूसरी ओर दुकानदारों ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि दशकों से इलाके में दुकानें संचालित हो रही हैं और हजारों परिवारों की रोजी-रोटी इससे जुड़ी हुई है। व्यापारियों का आरोप है कि यदि सरकार रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं करा सकती, तो लोगों की आजीविका छीनने का अधिकार भी उसे नहीं होना चाहिए।
पराठे और खानपान की दुकान चलाने वाले विकास गुप्ता ने बताया कि सीलिंग की आशंका के कारण मकान मालिक ने दुकान खाली करा दी है। उन्होंने कहा कि उनके यहां पांच कर्मचारी काम करते थे, जिन्हें हटाना पड़ा। नई जगह दुकान मिलना आसान नहीं है और कारोबार बंद होने की स्थिति बन गई है।
इसी तरह चाप की दुकान चलाने वाले नवीन ने कहा कि दुकान बंद होने से उन्हें 25 कर्मचारियों को हटाना पड़ रहा है। उन्होंने चिंता जताई कि परिवार और बच्चों की पढ़ाई का खर्च कैसे चलेगा, यह समझ नहीं आ रहा है।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यदि सीलिंग अभियान बड़े स्तर पर चला, तो इसका असर केवल दुकानदारों पर ही नहीं बल्कि क्षेत्र की स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार पर भी पड़ेगा। फिलहाल इलाके में भय और असमंजस का माहौल बना हुआ है और लोग प्रशासन के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं।




