भारत की आत्मा उसकी संस्कृति, आस्था, परंपरा और अदम्य साहस में बसती है। जब भी देश ने अपने स्वाभिमान को चुनौती देने वाली शक्तियों का सामना किया, तब भारत ने दुनिया को यह दिखाया कि वह केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की जीवित सभ्यता है। गुजरात के पवित्र तट पर स्थित सोमनाथ मंदिर इसी अमर चेतना का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर जब पोखरण परमाणु परीक्षण का उल्लेख किया, तब उन्होंने भारत की आध्यात्मिक शक्ति और वैज्ञानिक सामर्थ्य को एक सूत्र में जोड़ दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 11 मई 1998 को जब भारत ने राजस्थान के पोकरण टेस्ट रेंज में परमाणु परीक्षण किया, तब पूरी दुनिया की नजरें भारत पर टिक गई थीं। अनेक शक्तिशाली देशों ने भारत को रोकने और दबाने का प्रयास किया, आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए, लेकिन भारत झुका नहीं। देश ने दुनिया को दिखा दिया कि वह किसी दबाव में आने वाला राष्ट्र नहीं है। यह केवल परमाणु परीक्षण नहीं था, बल्कि भारत के आत्मविश्वास और राजनीतिक इच्छाशक्ति का उद्घोष था।
भारत ने इस मिशन को “ऑपरेशन शक्ति” नाम दिया था। यह नाम केवल सैन्य ताकत का प्रतीक नहीं था, बल्कि भारतीय संस्कृति में शिव और शक्ति की आराधना की परंपरा से जुड़ा हुआ था। प्रधानमंत्री ने भगवान सोमनाथ के चरणों में नमन करते हुए ऑपरेशन शक्ति को याद किया और कहा कि भारत की शक्ति उसकी आध्यात्मिक जड़ों से निकलती है।
1998 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारत ने पांच सफल परमाणु परीक्षण किए थे। इस मिशन में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और डॉ. आर चिदंबरम की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। विदेशी खुफिया एजेंसियों को इसकी भनक तक नहीं लगी और भारत ने दुनिया को अपनी वैज्ञानिक क्षमता का परिचय दिया। इसके बाद अमेरिका, जापान और कई पश्चिमी देशों ने भारत पर प्रतिबंध लगाए, लेकिन देश डटा रहा। यही वह समय था जब दुनिया ने भारत की अटल इच्छाशक्ति को पहचाना।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत को कोई शक्ति झुका नहीं सकती। उन्होंने सोमनाथ मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि इस मंदिर को बार बार तोड़ा गया, लेकिन हर बार इसका पुनर्निर्माण हुआ। आक्रमणकारियों ने इसकी भव्यता मिटाने की कोशिश की, मगर भारत की आस्था और संस्कृति को कभी समाप्त नहीं कर सके। यही भारत की सबसे बड़ी ताकत है।
सोमनाथ मंदिर केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत के स्वाभिमान, धैर्य और पुनर्जागरण का प्रतीक है। अरब सागर के किनारे स्थित यह ज्योतिर्लिंग सदियों से करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। मान्यता है कि चंद्रदेव ने यहां तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया था, इसलिए इसका नाम सोमनाथ पड़ा।
इतिहास बताता है कि सोमनाथ मंदिर को कई बार लूटा और तोड़ा गया। महमूद गजनवी से लेकर औरंगजेब तक अनेक आक्रमणकारियों ने इस मंदिर को मिटाने का प्रयास किया। लेकिन हर बार भारत की जनता ने इसे फिर खड़ा किया। यह केवल पत्थरों का निर्माण नहीं था, बल्कि आत्मसम्मान की पुनर्स्थापना थी।
स्वतंत्रता के बाद भारत के लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया। उन्होंने यह संदेश दिया कि आजाद भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत को फिर गौरव दिलाएगा। उनके निधन के बाद के एम मुंशी ने इस कार्य को आगे बढ़ाया। जनता के सहयोग से मंदिर का निर्माण पूरा हुआ और 11 मई 1951 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसकी प्राण प्रतिष्ठा की।
सोमनाथ मंदिर अपनी स्थापत्य कला के लिए भी विश्व प्रसिद्ध है। चालुक्य और मरु गुर्जर शैली में बने इस मंदिर की ऊंचाई लगभग 155 फीट है। मंदिर के शिखर पर विशाल ध्वज लहराता है जिसे दिन में तीन बार बदला जाता है। खास बात यह है कि मंदिर के निर्माण में लोहे का उपयोग नहीं किया गया। बलुआ पत्थर से बना यह मंदिर भारतीय शिल्पकला का अद्भुत उदाहरण है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में विरासत और आधुनिकता साथ साथ चलती हैं। एक ओर देश परमाणु शक्ति संपन्न बनता है, चंद्रयान मिशन सफल करता है, वहीं दूसरी ओर अपनी सांस्कृतिक जड़ों को भी मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि जब नई पीढ़ी अपने इतिहास और परंपराओं से जुड़ती है, तब राष्ट्र का आत्मबल और अधिक सशक्त होता है।
आज भारत दुनिया में नई शक्ति के रूप में उभर रहा है। विज्ञान, तकनीक, रक्षा और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। लेकिन इस प्रगति की सबसे बड़ी नींव भारत की संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना है। सोमनाथ मंदिर हमें यही संदेश देता है कि कठिन से कठिन समय में भी अगर राष्ट्र अपनी जड़ों से जुड़ा रहे, तो उसे कोई पराजित नहीं कर सकता।
पोखरण का परमाणु परीक्षण और सोमनाथ का पुनर्निर्माण, दोनों घटनाएं भारत के आत्मविश्वास की प्रतीक हैं। एक ने दुनिया को भारत की वैज्ञानिक शक्ति दिखाई, तो दूसरे ने भारत की सांस्कृतिक अमरता को सिद्ध किया। यही कारण है कि सोमनाथ केवल मंदिर नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। यह देश की शान, गौरव और सनातन चेतना का अद्भुत प्रतीक है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार एवं स्तम्भकार है)


