वक्फ रिपोर्ट पर रास में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप, विपक्ष का बहिर्गमन

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नई दिल्ली, (वेब वार्ता)। वक्फ संशोधन विधेयक से संबंधित संयुक्त संसदीय समिति की रिपोर्ट को लेकर बृहस्पतिवार को राज्यसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर चला, जहां विपक्ष ने आरोप लगाया कि रिपोर्ट से सदस्यों के असहमति नोट हटाये गये हैं वहीं सत्ता पक्ष ने कहा कि सदन में पेश की गयी रिपोर्ट से असहमति नोट तथा सदस्यों की बातें नहीं हटायी गयी हैं।

भारतीय जनता पार्टी की डाॅ. मेधा विश्राम कुलकर्णी ने जैसे ही यह रिपोर्ट पेश की, विपक्षी सदस्यों ने अपनी जगह से खड़े होकर इसका कड़ा विरोध किया। सभापति ने हंगामे के कारण कुछ देर के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित भी की।

स्थगन के बाद जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने एक दूसरे पर आरोप लगाये। बाद में विपक्षी सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया।

नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि वक्फ विधेयक से संबंधित संयुक्त समिति की रिपोर्ट से सदस्यों के असहमति के नोट हटाया जाना उचित नहीं है और वह इसकी निंदा करते हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया तथा लोकतंत्र का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में बाहरी लोगों के सुझाव लिए गये हैं, यह बड़ी हैरानी की बात है। उन्होंने कहा कि असहमति के नोट के साथ रिपोर्ट दी जानी चाहिए, इनके बिना विपक्ष इस रिपोर्ट को नहीं मानेगा। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में यदि असहमति के पत्र नहीं हैं तो उसे वापस भेजें और फिर सदन में पेश करें।

उन्होंने कहा कि सदस्य समाज के साथ हो रहे अन्याय का विरोध कर रहे हैं। हम देश में समावेशी विकास चाहते हैं। लेकिन सरकार यदि संविधान के खिलाफ कार्य करती है तो विपक्ष विरोध करेगा। इस रिपोर्ट को समिति को दोबारा भेजें और इसकी समीक्षा के बाद दोबारा पेश किया जाये।

नेता सदन जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि वाद विवाद और चर्चा लोकतंत्र का हिस्सा है लेकिन हमें परंपराओं का ध्यान रखना चाहिए और संवैधानिक प्रावधान के तहत सदन की कार्यवाही को चलाना चाहिए। यह खेद की बात है कि बार बार के अनुरोध के बावजूद राष्ट्रपति का संदेश इस सदन में सही तरीके से नहीं रखा जा सका। इस पर विपक्ष के रवैये की सदन निंदा करता है।

द्रमुक के तिरूचि शिवा ने नियम 274 का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी रिपोर्ट असहमति नोट के साथ ही सदन में पेश की जा सकती है। आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने कहा कि मैं समिति का सदस्य हूं आप हमारी बात से सहमत या असहमत हो सकते हैं लेकिन हमारी बात को रिपोर्ट से बाहर कैसे निकाल सकते हैं।

भारतीय जनता पार्टी के भूपेन्द्र यादव ने कहा कि नियम 274 स्थायी समिति की रिपोर्ट के लिए होता है। प्रवर समिति की प्रक्रिया नियम 72 से 94 में उल्लेखित है और इसमें सभापति को अधिकार दिया गया है कि यदि सभापति को लगता है कि असहमति के नोट नियमों के विरूद्ध हैं तो उन्हें हटाया जा सकता है।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि रिपोर्ट से कुछ भी नहीं हटाया गया है और सदन को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है। रिपोर्ट को बनाने में किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया गया है। सभी असहमति नोट रिपोर्ट में हैं और सदन को गलत जानकारी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि जब रिपोर्ट पेश की जाती है तो उस पर चर्चा बाद में होती है। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने समिति के अध्यक्ष से बात की है और रिपोर्ट में से बिना कोई हिस्सा हटाये उसे पेश किया गया है। आज चर्चा का मौका नहीं है। ”

कांग्रेस के नासिर हुसैन ने कहा कि कि संसदीय कार्य मंत्री सदन को भ्रमित कर रहे हैं। मेरा असहमति नोट रिपोर्ट में नहीं है। रिपोर्ट में बाहरी लोगों की बातें शामिल की गयी हैं। यह रिपोर्ट सही नहीं है, इसे वापस करना चाहिए।

तृणमूल कांग्रेस के साकेत गोखले ने पूछा कि असहमति नोट के कुछ हिस्सों को क्यों हटाया गया है।

सभापति ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री ने साफ कर दिया है कि किसी भी सदस्य की किसी भी बात को रिपोर्ट से नहीं हटाया गया है और विपक्ष का रवैया गैर जिम्मेदाराना है।

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