(ममता तिवारी)
कुशीनगर 26 अक्टूबर।कुशीनगर जिले में एपी तटबंध के अहिरौली दान क्षेत्र में गंडक नदी की कटान रोकना बाढ़ खंड के लिए चुनौती बन गई है। डिस्चार्ज घटने के बावजूद नदी की धारा तटबंध से सटकर करीब एक किलोमीटर तक बह रही है। इससे एप्रन पर दबाव बढ़ने और उसके क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना हुआ है।
बड़ी गंडक नदी का डिस्चार्ज घटने के बावजूद अहिरौली दान में कटान थम नहीं रहा है। एपी तटबंध के किमी 13.200 से 14.500 के बीच किमी 13.980 पर नदी की धारा तटबंध के किनारे बह रही है। यहां लगातार बोल्डर डाले जाने के बावजूद जमीन कटने का सिलसिला जारी है। नदी की बदलती धारा से तटबंध और आसपास की आबादी पर खतरा बना हुआ है। कटान से सहमे ग्रामीणों को अपने घर, खेत और पुश्तैनी जमीन की चिंता सता रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले गंडक की धारा तटबंध से काफी दूर बहती थी, लेकिन धीरे-धीरे नदी का रुख बदलता गया और अब कई स्थानों पर वह तटबंध के किनारे तक पहुंच गई है।
कटान की यही स्थिति बनी रही तो आसपास की जमीन के साथ घरों पर भी संकट गहरा सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर घटने के बाद भी किनारों का कटना जारी है, जिससे उनकी चिंता कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है। कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड की ओर से बचाव कार्य किए जा रहे हैं, लेकिन प्रभावित हिस्से में कटान जारी है। बाढ़ खंड के एसडीओ दीप रतन सिंह ने बताया कि नदी का डिस्चार्ज यानी पानी की कुल मात्रा और किसी खास स्थान पर धारा का वेग अलग-अलग हैं। डिस्चार्ज घटने के बावजूद यदि नदी की धारा किसी स्थान पर सिमटकर तटबंध के किनारे बहने लगती है तो वहां स्थानीय वेग और दबाव बढ़ सकता है। नदी की धारा का रुख, तलहटी की बनावट और किनारे की मिट्टी की प्रकृति भी कटान को प्रभावित करती है। उन्होंने बताया कि ऐसी परिस्थितियों में पानी का स्तर कम होने पर भी नदी में बैक रोलिंग की स्थिति के कारण कटान जारी रह सकता है। बाढ़ के दौरान पानी से कमजोर हुई मिट्टी जलस्तर घटने के बाद भी ढह सकती है। विभाग की ओर से कटान रोकने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रविवार को नवनियुक्त अधिशासी अभियंता वीके वर्मा, बीएचयू के प्रोफेसर केके पांडेय, एसई रमेश प्रसाद और बाढ़ खंड के अभियंताओं ने मौके का निरीक्षण किया। उन्होंने कटान और बचाव कार्यों का जायजा लेकर नदी की धारा को तटबंध से दूर मोड़ने के उपायों पर चर्चा की।
विभाग की ओर से बोल्डर, मिट्टी, पीपी रोप और गैवियन से बचाव कार्य किए जा रहे हैं। इसके बावजूद कटान जारी रहने से ग्रामीणों में चिंता है। उन्होंने संवेदनशील हिस्से को सुरक्षित रखने के लिए प्रभावी और स्थायी समाधान की मांग की है।



