कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के जच्चा-बच्चा अस्पताल में 12 वर्षीय बालिका रीता (परिवर्तित नाम) का एक अत्यंत दुर्लभ एवं जटिल जन्मजात विकार का सफलतापूर्वक उपचार किया गया। बच्ची उपचार के बाद अब पूरी तरह से स्वस्थ्य है।
डॉ पाविका लाल ने बताया कि नर्वल, कानपुर निवासी 12 वर्षीय बालिका को पेट के दाहिने निचले हिस्से में दर्द तथा माहवारी के दौरान होने वाले चक्रीय दर्द की शिकायत थी। जांच में पेट के निचले हिस्से में एक गांठ महसूस हुई। अल्ट्रासाउंड जांच में लगभग 8 × 5 सेमी की सिस्टिक संरचना दिखाई दी। इसके बाद एमआरआई जांच में एक अत्यंत दुर्लभ शारीरिक संरचना सामने आई। दोनों गुर्दे अपने सामान्य स्थान पर न होकर एक ही तरफ स्थित और आपस में जुड़े हुए पाए गए। साथ ही बच्ची में एक तरफ का अविकसित गर्भाशय रक्त से भरी गर्भाशय एवं योनि तथा योनि में मोटे सेप्टम की उपस्थिति पाई गई। ये सभी निष्कर्ष ओविरा सिंड्रोम की ओर संकेत कर रहे थे। ऑप्रेशन के दौरान यूनीकॉर्नयूट यूरेटस तथा दाईं ओर की फॉओपन ट्यूब पाई गई। रक्त से भरे हेमटोकोलेप्स को खोलकर लगभग 30-40 एमएल पुराना रक्त निकाला गया। आंशिक कर्विकल एजेंसीस भी पाया गया। इसके बाद पेट तथा योनि दोनों ओर से प्रयास कर मोटे वजिनल स्पुटल में वजिनोप्लासटी द्वारा मार्ग बनाया गया। इसके लिए एक महिला की डिलेवरी के बाद गर्भाशय से निकलने वाली कनारी की झिल्ली का उपयोग किया गया। गर्भाशय की गुहा एवं योनि के बीच संचार स्थापित किया गया। उचित ड्रेंज के लिए मेलीकॉट कैथेटर लगाया गया। यह जटिल शल्य चिकित्सा डॉ. दिव्या त्रिपाठी, डॉ. पाविका लाल एवं डॉ. शैली अग्रवाल की सर्जिकल टीम द्वारा की गई।
12 वर्षीय बालिका की दुर्लभ जन्मजात विकृति का सफल उपचार

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