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कश्मीर में स्थापित हो एम्स यूनानी, केंद्र सरकार से ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस की पुरजोर मांग

श्रीनगर में राष्ट्रीय स्तर के यूनानी चिकित्सा संस्थान की स्थापना से चिकित्सा, शोध और शिक्षा को मिलेगी नई दिशा; आयुष मंत्रालय को पत्र लिखकर ठोस पहल करने का आग्रह

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर (वेब वार्ता)।

यूनानी चिकित्सा पद्धति को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने और उसके शैक्षणिक एवं चिकित्सकीय विस्तार को गति देने के उद्देश्य से ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस ने केंद्र सरकार के समक्ष एक महत्वपूर्ण मांग उठाई है। संगठन ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में अखिल भारतीय यूनानी चिकित्सा संस्थान (ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ यूनानी मेडिसिन) की स्थापना के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने की अपील की है। संगठन का कहना है कि कश्मीर में इस स्तर के संस्थान की स्थापना न केवल यूनानी चिकित्सा पद्धति के विकास के लिए महत्वपूर्ण होगी, बल्कि इससे चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, विशेषज्ञ उपचार और रोजगार के नए अवसरों का मार्ग भी प्रशस्त हो सकता है।

ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रोफेसर मुश्ताक अहमद ने पिछले महीने संगठन की जम्मू-कश्मीर इकाई की जनरल बॉडी मीटिंग में पारित प्रस्तावों के संदर्भ में केंद्र सरकार को पत्र भेजकर यह मांग उठाई है। उन्होंने भारत सरकार के आयुष मंत्रालय से आग्रह किया है कि इस प्रस्ताव को प्राथमिकता देते हुए श्रीनगर में राष्ट्रीय महत्व के यूनानी चिकित्सा संस्थान की स्थापना की दिशा में समयबद्ध और व्यावहारिक कार्रवाई की जाए।

प्रोफेसर मुश्ताक अहमद ने अपने पत्र में यूनानी चिकित्सा संस्थान की स्थापना के पुराने वादे का उल्लेख करते हुए कहा है कि वर्ष 2004 में एम्स आयुर्वेद की स्थापना के बाद एम्स यूनानी की स्थापना का वादा किया गया था। हालांकि, उनके अनुसार, इस दिशा में अब तक अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी है। ऐसे में यूनानी चिकित्सा पद्धति से जुड़े चिकित्सकों, शिक्षाविदों, विद्यार्थियों और आम लोगों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए सरकार को अब निर्णायक पहल करनी चाहिए।
संगठन ने इस मुद्दे को केवल एक नए संस्थान की स्थापना तक सीमित नहीं माना है, बल्कि इसे देश में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के संतुलित विकास और यूनानी चिकित्सा को बेहतर संस्थागत अवसर उपलब्ध कराने से जुड़ा विषय बताया है। कांग्रेस का मानना है कि जब आयुष चिकित्सा पद्धतियों के विस्तार की योजनाएं सामने आ रही हैं, तब यूनानी चिकित्सा के लिए भी राष्ट्रीय स्तर पर समुचित सुविधाएं विकसित करना आवश्यक है।
ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस ने अपने पत्र में वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान आयुष के तीन नए एम्स खोलने की योजना का संदर्भ देते हुए केंद्र सरकार से मांग की है कि इस अवसर का उपयोग यूनानी चिकित्सा के लिए एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थान स्थापित करने में किया जाए।
संगठन का तर्क है कि यदि नए संस्थानों की स्थापना की दिशा में योजनाएं बनाई जा रही हैं, तो यूनानी चिकित्सा को भी उनमें उचित स्थान मिलना चाहिए। श्रीनगर में अखिल भारतीय यूनानी चिकित्सा संस्थान की स्थापना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। इससे यूनानी चिकित्सा की पारंपरिक विरासत को आधुनिक शैक्षणिक, चिकित्सकीय और अनुसंधान संबंधी आवश्यकताओं के साथ जोड़ने का अवसर मिलेगा।
जम्मू-कश्मीर में यूनानी चिकित्सा की ऐतिहासिक पहचान और पारंपरिक चिकित्सा के प्रति लोगों की रुचि को देखते हुए श्रीनगर में राष्ट्रीय स्तर के संस्थान की स्थापना का प्रस्ताव विशेष महत्व रखता है। संगठन का मानना है कि यहां एक आधुनिक और सुव्यवस्थित यूनानी चिकित्सा संस्थान स्थापित होने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले मरीजों, विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को भी लाभ मिल सकता है।
ऐसे संस्थान में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं, उच्चस्तरीय प्रशिक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान और पारंपरिक यूनानी ज्ञान के दस्तावेजीकरण की संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं। इसके साथ ही, औषधीय पौधों, यूनानी औषधियों की गुणवत्ता, उपचार पद्धतियों के वैज्ञानिक मूल्यांकन और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं। हालांकि, इन सुविधाओं का वास्तविक स्वरूप संस्थान की स्वीकृत योजना, बजट और शैक्षणिक ढांचे पर निर्भर करेगा।
ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस का मानना है कि अखिल भारतीय स्तर के संस्थान की स्थापना से यूनानी चिकित्सा पद्धति को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। संगठन के अनुसार, उच्चस्तरीय संस्थान बनने से इस चिकित्सा पद्धति से जुड़े चिकित्सकों और विद्यार्थियों को प्रोत्साहन मिलेगा तथा शोध एवं ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए बेहतर मंच उपलब्ध हो सकता है।
प्रोफेसर मुश्ताक अहमद ने केंद्र सरकार से अपेक्षा जताई है कि वह इस मांग पर गंभीरता से विचार करते हुए इसे केवल पत्राचार और घोषणाओं तक सीमित न रखे, बल्कि स्थापना की संभावनाओं, आवश्यक संसाधनों और प्रशासनिक प्रक्रिया पर ठोस कार्रवाई करे। संगठन की दृष्टि में यह पहल भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत को व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
कश्मीर में एम्स यूनानी की स्थापना की मांग के साथ ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस ने केंद्र सरकार के सामने एक ऐसा मुद्दा रखा है, जिसका संबंध चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, शोध और पारंपरिक चिकित्सा के भविष्य से है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आयुष मंत्रालय इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाता है और क्या श्रीनगर में संस्थान की स्थापना के लिए कोई ठोस कार्ययोजना सामने आती है।
यदि सरकार इस प्रस्ताव को स्वीकृति और आवश्यक संसाधनों के साथ आगे बढ़ाती है, तो यह जम्मू-कश्मीर के लिए एक महत्वपूर्ण संस्थागत उपलब्धि और देश में यूनानी चिकित्सा के विकास के लिए नई शुरुआत हो सकती है। फिलहाल, ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस ने अपनी मांग केंद्र सरकार तक पहुंचा दी है और संगठन को उम्मीद है कि लंबे समय से उठाए जा रहे इस विषय पर अब सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।

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