सास-बहू की नोकझोंक भारतीय मनोरंजन की दुनिया में लंबे समय से आजमाया हुआ विषय है, लेकिन जब इसी कहानी में 40 साल से बोतल में कैद एक भूत की एंट्री हो जाए तो कहानी का अंदाज पूरी तरह बदल जाता है। वेब शो ‘सास बहू और भूत’ इसी अनोखे मेल के साथ पारिवारिक हास्य और डरावने माहौल को एक साथ पेश करता है। यह शो आरडीसी टीवी के यूट्यूब चैनल पर 1 अक्टूबर से शुरू हुआ है और रोज शाम 7 बजे प्रसारित किया जा रहा है।
कहानी का केंद्र एक पुराना और रहस्यमयी बंगला है, जिसका नाम ‘दीमक धाम’ है। इस बंगले के एक अंधेरे कमरे में लाल रंग की कांच की बोतल रखी है, जिसमें एक भूत पिछले 40 वर्षों से कैद है। भूत आजादी के लिए बेताब है और वह वादा करता है कि जो भी उसे बोतल से बाहर निकालेगा, वह अगले सात वर्षों तक उसका गुलाम बनकर रहेगा।
लेकिन भूत को क्या पता कि उसकी आजादी उसे ऐसी सास-बहू की जोड़ी तक पहुंचाने वाली है, जहां डराने वाला खुद ही डरकर भागता नजर आएगा।
रहस्यमयी कमरे में पहुंची सास-बहू
कहानी वर्ष 1976 से शुरू होती है। धूल, मकड़ी के जालों और वीरानी से घिरे ‘दीमक धाम’ में साल्गांवकर परिवार के आने के बाद घटनाओं का सिलसिला शुरू होता है। परिवार में तेज-तर्रार सास, हाजिरजवाब बहू, सीधे-सादे ससुर और सास-बहू के बीच फंसा बेटा शामिल हैं। उनके साथ घर का पुराना नौकर भी है।
घर में कदम रखते ही सास और बहू के बीच तकरार शुरू हो जाती है। इसी दौरान दोनों की नजर एक ऐसे कमरे पर पड़ती है, जिस पर भारी ताला लगा हुआ है। नौकर उन्हें चेतावनी देता है कि मालिक ने कमरे को खोलने से सख्त मना किया है।
लेकिन सास-बहू की जिज्ञासा चेतावनी से ज्यादा मजबूत साबित होती है। दोनों किसी तरह कमरे की चाबी हासिल कर लेती हैं और अंदर पहुंच जाती हैं। कमरे में उन्हें लाल रंग की कांच की बोतल दिखाई देती है। बोतल को लेकर दोनों के बीच छीना-झपटी शुरू हो जाती है और इसी दौरान बोतल जमीन पर गिरकर टूट जाती है।
40 साल बाद आजाद हुआ भूत
बोतल टूटते ही धुएं के गुबार के बीच 40 साल से कैद भूत आजाद हो जाता है। आजादी मिलने की खुशी में वह अपने वादे के मुताबिक सास-बहू की सात साल तक सेवा करने की घोषणा करता है।
लेकिन जल्द ही उसे समझ आ जाता है कि उसने आजादी के बदले जिस गुलामी का वादा किया है, वह उसके लिए किसी सजा से कम नहीं। घर में सास-बहू की तकरार लगातार बढ़ती रहती है। दोनों के बीच होने वाली बहस, ताने और घरेलू झगड़ों से भूत इस कदर परेशान हो जाता है कि इंसानों को डराने वाला यह किरदार खुद ही उनसे बचता दिखाई देता है।
डराने वाला भूत खुद डरने लगा
शो का सबसे दिलचस्प हास्य पक्ष यही है कि यहां भूत कहानी का डर पैदा करने वाला पात्र नहीं, बल्कि खुद परेशानी में फंसा हुआ किरदार बन जाता है। कभी वह सोफे के पीछे छिपता है तो कभी घर के किसी कोने में जाकर सास-बहू की बहस से बचने की कोशिश करता है। इस उलटफेर को ही शो की हास्य शैली का आधार बनाया गया है। जहां सामान्य डरावनी कहानियों में भूत इंसानों को डराता है, वहीं ‘सास बहू और भूत’ में इंसानों के घरेलू विवाद से भूत ही भयभीत नजर आता है।
पुलिस इंस्पेक्टर और तांत्रिक की भी एंट्री
सास-बहू के अलावा ससुर, बेटा और घर का नौकर भी इस अजीबोगरीब घटनाक्रम को और मनोरंजक बनाते हैं। कहानी आगे बढ़ने पर पुलिस निरीक्षक सौदामिनी और एक तांत्रिक की भी एंट्री होती है। इन पात्रों के आने से रहस्य और हास्य का दायरा और बढ़ जाता है। तांत्रिक का अंदाज भी डर के माहौल को हास्य में बदलने का काम करता है। इस तरह कहानी पारंपरिक भूत वाली कथा से अलग होकर पारिवारिक मनोरंजन का रूप लेती है।
कलाकारों ने संभाला हास्य का मोर्चा
परन गाला और प्राची घिल्डियाल ने सास और बहू की भूमिकाओं में अपनी नोकझोंक से कहानी को गति दी है। दोनों के बीच होने वाली बहस और एक-दूसरे पर भारी पड़ने की कोशिशें कथा का प्रमुख आकर्षण हैं। पंकज उपाध्याय ने भूत की भूमिका में हास्यपूर्ण अंदाज अपनाया है। उनका किरदार इस कहानी की सबसे बड़ी विडंबना बनकर सामने आता है। जो पात्र दूसरों को डराने के लिए जाना चाहिए, वही सास-बहू के घरेलू विवाद से परेशान होकर खुद बचने की कोशिश करता दिखाई देता है। मो. मुदस्सिर, साहिल त्यागी, महेंद्र कुमार, मेलानी पेस और रवींद्र कुमार भी अपने-अपने किरदारों के जरिए कहानी में मनोरंजन का रंग जोड़ते हैं।
डर से ज्यादा हंसी पर जोर
निर्देशक संकेत श्रीरंग चक्रवर्ती और निर्माता राजेश रणशिंगे ने पारंपरिक डरावनी कहानी के ढांचे को बदलने की कोशिश की है। यहां भूत का इस्तेमाल भय पैदा करने के बजाय हास्य की परिस्थितियां बनाने के लिए किया गया है।
शो की कहानी का मूल विचार सरल है—सास और बहू की नोकझोंक में फंसा एक ऐसा भूत, जो सात साल तक दोनों की सेवा करने के वादे के कारण उनसे छुटकारा भी नहीं पा सकता। इसी वजह से यह शो उन दर्शकों के लिए अधिक उपयुक्त नजर आता है, जिन्हें पारिवारिक हास्य के साथ हल्का डरावना मनोरंजन पसंद है। लगभग 20 से 25 मिनट की अवधि वाला यह कार्यक्रम रोजमर्रा के पारिवारिक मनोरंजन के लिए हल्का-फुल्का विकल्प प्रस्तुत करता है।




