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इंडिगो ने फिर बढ़ाया ईंधन शुल्क, 6 अक्टूबर से महंगा होगा हवाई सफर

नई दिल्ली, 5 अक्टूबर (वेब वार्ता)। हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों की जेब पर एक बार फिर अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है। देश की प्रमुख विमानन कंपनी इंडिगो ने विमान ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर ईंधन शुल्क बढ़ाने का फैसला किया है। नई दरें 6 अक्टूबर 2026 से लागू होंगी। एयरलाइन के अनुसार, पिछले महीने विमानन टर्बाइन ईंधन की कीमत में 14 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है, जिसके कारण परिचालन लागत में बढ़ोतरी हुई है।

इंडिगो ने घरेलू उड़ानों में दूरी के आधार पर ईंधन शुल्क बढ़ाकर 375 रुपये से 1,300 रुपये प्रति खंड कर दिया है। इससे पहले घरेलू उड़ानों के लिए यह शुल्क 275 रुपये से 950 रुपये प्रति खंड के बीच था। यानी दूरी के आधार पर यात्रियों को पहले की तुलना में 100 रुपये से लेकर 350 रुपये तक अधिक भुगतान करना पड़ सकता है।

घरेलू उड़ानों के लिए नई दरें

इंडिगो ने घरेलू उड़ानों के लिए ईंधन शुल्क दूरी के आधार पर अलग-अलग निर्धारित किया है।

उड़ान की दूरीपुराना शुल्कनया शुल्क
0 से 500 किलोमीटर275 रुपये375 रुपये
501 से 1,000 किलोमीटर400 रुपये600 रुपये
1,001 से 1,500 किलोमीटर—900 रुपये
1,501 से 2,000 किलोमीटर—1,150 रुपये
2,000 किलोमीटर से अधिक950 रुपये1,300 रुपये

नई व्यवस्था के तहत सबसे लंबी घरेलू उड़ानों पर यात्रियों को प्रति खंड 1,300 रुपये का ईंधन शुल्क देना होगा। वापसी की यात्रा में दोनों दिशाओं के लिए शुल्क अलग-अलग लागू होने के कारण कुल अतिरिक्त खर्च और बढ़ सकता है।

विमान ईंधन की कीमतों में 14 प्रतिशत से अधिक वृद्धि

इंडिगो के मुताबिक, विमानन टर्बाइन ईंधन की कीमत में पिछले महीने 14 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। विमान ईंधन एयरलाइन के परिचालन खर्च का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ईंधन की कीमतों में बदलाव का सीधा असर विमानन कंपनियों की लागत पर पड़ता है।

एयरलाइन का कहना है कि बढ़ती ईंधन लागत की भरपाई के लिए ईंधन शुल्क में संशोधन किया गया है। इससे पहले भी इंडिगो ने अप्रैल में घरेलू उड़ानों के ईंधन शुल्क में बदलाव किया था।

अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी बढ़ा शुल्क

इंडिगो ने केवल घरेलू उड़ानों तक ही शुल्क वृद्धि सीमित नहीं रखी है। अंतरराष्ट्रीय मार्गों के लिए भी नई ईंधन शुल्क दरें निर्धारित की गई हैं।

सार्क क्षेत्र में 500 किलोमीटर तक की उड़ानों के लिए 1,000 रुपये और लंबी दूरी की उड़ानों के लिए 3,000 रुपये का ईंधन शुल्क निर्धारित किया गया है।

दक्षिण-पूर्व एशिया, खाड़ी सहयोग परिषद, पश्चिम एशिया तथा उत्तर और पूर्व एशिया के मार्गों के लिए 5,500 रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया है।

वहीं, अफ्रीका के लिए ईंधन शुल्क 6,000 रुपये और यूरोप के लिए 10,000 रुपये तय किया गया है।

यात्रियों पर कैसे पड़ेगा असर?

ईंधन शुल्क में वृद्धि का सीधा असर हवाई टिकट की कुल कीमत पर पड़ेगा। हालांकि, वास्तविक टिकट कीमत पर प्रभाव मार्ग, यात्रा की तारीख, टिकट की श्रेणी और अन्य शुल्कों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।

घरेलू यात्रियों के लिए सबसे लंबी दूरी वाले मार्गों पर अधिकतम 1,300 रुपये प्रति खंड का ईंधन शुल्क लागू होगा। यदि यात्री आने-जाने दोनों दिशाओं में इंडिगो की उड़ान लेता है तो दोनों उड़ानों पर लागू शुल्क के कारण अतिरिक्त भुगतान बढ़ सकता है।

अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए इसका प्रभाव मार्ग के अनुसार और अधिक हो सकता है। यूरोप जाने वाली उड़ानों के लिए 10,000 रुपये का ईंधन शुल्क निर्धारित किया गया है।

ईंधन लागत बनी विमानन कंपनियों के लिए चुनौती

विमानन उद्योग में ईंधन की कीमत परिचालन लागत को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल है। ईंधन की कीमत बढ़ने पर विमानन कंपनियों को या तो परिचालन लागत का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ता है या उसका कुछ हिस्सा यात्रियों से शुल्क के रूप में वसूलना पड़ता है।

इंडिगो का ताजा फैसला ऐसे समय आया है जब विमान ईंधन की कीमतों में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। नई दरें लागू होने के बाद घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों श्रेणियों में इंडिगो से यात्रा करने वाले यात्रियों को टिकट की कुल लागत में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ेगा।

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