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सेबी की चेतावनी: नकली निवेश ऐप से रहें सावधान, ‘प्रोजेक्ट जागरूक’ से बढ़ेगी सुरक्षा

नई दिल्ली, 5 अक्टूबर (वेब वार्ता)। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने खुदरा निवेशकों को बढ़ते निवेश फर्जीवाड़े को लेकर सतर्क किया है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से पहली बार निवेश करने वाले लोगों को ठगी का निशाना बनाया जा रहा है। जालसाज नकली मोबाइल ऐप, फर्जी पहचान और बैंक खातों के माध्यम से लोगों को यह विश्वास दिलाते हैं कि उनका पैसा प्रतिभूति बाजार में निवेश किया जा रहा है, जबकि वास्तव में धन बाजार में पहुंचता ही नहीं है।

निवेशकों को जागरूक करने और उन्हें सही जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सेबी की ओर से ‘प्रोजेक्ट जागरूक’ जैसी पहल पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य नए और संभावित निवेशकों को निवेश से जुड़े जोखिमों, अवसरों और धोखाधड़ी के तरीकों के बारे में विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध कराना है।

नकली ऐप के जरिए हो रही ठगी

तुहिन कांत पांडे के अनुसार, निवेश के नाम पर होने वाली कई धोखाधड़ियां वास्तव में वास्तविक निवेश से जुड़ी ही नहीं होतीं। जालसाज लोगों को नकली मोबाइल ऐप या फर्जी माध्यमों के जरिए अपने संपर्क में लेते हैं और उन्हें शेयर बाजार या अन्य प्रतिभूतियों में निवेश करने का भरोसा दिलाते हैं।

पीड़ितों को अपने खाते में निवेश की रकम जमा करने के लिए कहा जाता है। उन्हें ऐप पर कथित निवेश, लाभ और धनराशि से संबंधित जानकारी भी दिखाई जा सकती है। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में जमा किया गया पैसा वास्तविक प्रतिभूति बाजार में निवेश नहीं होता।

‘म्यूल खातों’ के जरिए धन का स्थानांतरण

धोखाधड़ी करने वाले गिरोह अक्सर धन को कई बैंक खातों के माध्यम से स्थानांतरित करते हैं। ऐसे खातों को सामान्य तौर पर ‘म्यूल खाते’ कहा जाता है। इनके माध्यम से ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में भेजकर उसके वास्तविक स्रोत तक पहुंचना कठिन बनाने की कोशिश की जाती है।

कई मामलों में जब तक पीड़ित को ठगी का पता चलता है और वह साइबर पुलिस से संपर्क करता है, तब तक धन कई खातों में स्थानांतरित हो चुका होता है। इसलिए निवेशकों को किसी भी योजना में पैसा लगाने से पहले संबंधित व्यक्ति या संस्था की पूरी जांच करने की सलाह दी गई है।

निवेश से पहले करें सत्यापन

निवेशकों को सबसे पहले यह जांचना चाहिए कि जिस संस्था या व्यक्ति के माध्यम से निवेश की पेशकश की जा रही है, वह संबंधित नियामक के साथ पंजीकृत है या नहीं। इसके साथ ही निवेशक को यह भी समझना चाहिए कि उससे किस माध्यम से संपर्क किया गया है और निवेश के लिए किस खाते या मंच पर पैसा जमा करने को कहा जा रहा है।

सेबी ने निवेशकों के लिए विभिन्न सत्यापन सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। इनमें ‘सेबी चेक’ जैसी सुविधा शामिल है, जिसके माध्यम से निवेशक संबंधित इकाई की जानकारी की जांच कर सकते हैं।

किसी भी निवेश प्रस्ताव में असामान्य रूप से अधिक लाभ का वादा, तत्काल पैसा लगाने का दबाव या व्यक्तिगत बैंक खाते में धन जमा कराने की मांग को गंभीर चेतावनी के संकेत के रूप में लेना चाहिए।

क्या है ‘प्रोजेक्ट जागरूक’?

‘प्रोजेक्ट जागरूक’ का उद्देश्य देश में बढ़ती निवेशक संख्या के बीच लोगों तक सही और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना है। तुहिन कांत पांडे के अनुसार, भारत में करीब 15 करोड़ विशिष्ट निवेशक हैं और यह संख्या लगभग 20 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ रही है।

निवेशकों की बढ़ती संख्या के साथ नए निवेशकों को बाजार की कार्यप्रणाली, जोखिम और धोखाधड़ी के तरीकों के बारे में जानकारी देना भी महत्वपूर्ण हो गया है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए जागरूकता और निवेशक शिक्षा से जुड़े प्रयासों को विस्तार दिया जा रहा है।

अलग-अलग वर्गों तक पहुंचेगी जानकारी

निवेशक समुदाय एक समान नहीं है। इसमें युवा, वरिष्ठ नागरिक, वेतनभोगी कर्मचारी, कारोबारी और सेवानिवृत्त लोग शामिल हैं। इसके अलावा देश में अलग-अलग भाषाओं और सामाजिक पृष्ठभूमि वाले निवेशक हैं।

ऐसे में निवेशक जागरूकता से जुड़ी सामग्री को अलग-अलग वर्गों और भाषाओं की जरूरत के अनुसार तैयार करना जरूरी है। ‘प्रोजेक्ट जागरूक’ के माध्यम से इसी दिशा में व्यापक स्तर पर जानकारी पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।

व्हाट्सऐप चैनल के जरिए भी जागरूकता

निवेशकों तक जानकारी पहुंचाने के लिए सेबी ने व्हाट्सऐप चैनल भी शुरू किया है। प्रारंभिक चरण में इसका उपयोग मुख्य रूप से संदेश और जागरूकता संबंधी जानकारी पहुंचाने के लिए किया जाएगा। आगे चलकर इसे अधिक संवादात्मक बनाने की योजना है।

सेबी का जोर इस बात पर है कि निवेशक किसी भी प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले संबंधित जानकारी का सत्यापन करें। खासकर पहली बार निवेश करने वाले लोगों के लिए यह जरूरी है कि वे केवल आकर्षक लाभ के वादे के आधार पर निर्णय न लें।

निवेश से पहले संस्था की वैधता, संबंधित व्यक्ति की पहचान और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी की जांच करना ठगी से बचने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

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