यूपी राइज से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल, स्टार्टअप और रोजगार पर जोर

रायबरेली, 13 सितंबर (वेब वार्ता)। उत्तर प्रदेश सरकार के ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को साकार करने के लिए प्रदेश के युवाओं को उद्यमिता, नवाचार और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में प्रयास तेज किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में रायबरेली स्थित फिरोज गांधी प्रौद्योगिकी एवं अभियांत्रिकी संस्थान में ‘यूपी राइज : संवाद, संकल्प, सफलता’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 500 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। आयोजन का उद्देश्य युवाओं को केवल रोजगार पाने तक सीमित न रखकर उन्हें नए उद्यम खड़े करने और दूसरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करना रहा।

प्रदेश में तेजी से मजबूत हो रहा नव उद्यम परिवेश

कार्यक्रम में ग्लोबल टैक्सपेयर्स ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं जीएसटी शिकायत निवारण समिति के सदस्य मनीष खेमका ने युवाओं को प्रदेश में विकसित हो रहे नव उद्यम परिवेश और सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास देश की सबसे बड़ी युवा कार्यशक्ति है, जो प्रदेश की बड़ी ताकत है। युवाओं को अपनी क्षमता और प्रतिभा का उपयोग नए उद्यम खड़े करने में करना चाहिए।

मनीष खेमका ने बताया कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में पंजीकृत नव उद्यमों की संख्या करीब 120 थी, जो अब बढ़कर 24 हजार से अधिक हो चुकी है। इनमें करीब 50 प्रतिशत नव उद्यमों का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं। प्रदेश में आठ ऐसे नव उद्यम भी स्थापित हो चुके हैं, जिनका मूल्यांकन एक अरब डॉलर से अधिक है।

उन्होंने बताया कि सरकार की नव उद्यम नीति-2026 के माध्यम से युवाओं के लिए उद्यम स्थापित करने की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। इसके तहत पात्र युवाओं को प्रतिमाह 20 हजार रुपये तक निर्वाह भत्ता, 10 लाख रुपये तक प्रारूप अनुदान और 15 लाख रुपये तक बीज पूंजी उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।

पुराने नियम हटाकर कारोबार को बनाया जा रहा सुगम

कार्यक्रम में युवाओं को प्रदेश में कारोबारी वातावरण में हुए बदलावों की भी जानकारी दी गई। मनीष खेमका के अनुसार, कारोबार को सुगम बनाने के लिए 65 विभागों से जुड़े 4,675 से अधिक पुराने नियमों और अनुपालनों को समाप्त किया गया है। उन्होंने कहा कि इन सुधारों का असर प्रदेश के औद्योगिक विस्तार में भी दिखाई दे रहा है।

उनके मुताबिक राज्य में कारखानों की संख्या करीब 14 हजार से बढ़कर 31 हजार से अधिक हो चुकी है। उन्होंने युवाओं से सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर अपने विचारों को व्यावहारिक उद्यम में बदलने और प्रदेश के आर्थिक विकास में भागीदार बनने का आह्वान किया।

कृत्रिम मेधा और नई तकनीक पर विद्यार्थियों को मार्गदर्शन

कार्यक्रम में कृत्रिम मेधा सलाहकार, तकनीकी वास्तुकार एवं परिवहन विशेषज्ञ लता रस्तोगी और मनीष नाथ ने विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। उन्होंने कृत्रिम मेधा की उभरती तकनीकों, उनके उपयोग और नए कारोबारी अवसरों के बारे में जानकारी दी।

विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को बदलती तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप अपने कौशल को विकसित करने की सलाह दी। साथ ही प्रदेश सरकार की रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता से संबंधित योजनाओं के बारे में जानकारी देते हुए युवाओं को उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया गया।

12 नव उद्यम विचारों का हुआ चयन

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को अपने नए कारोबारी और तकनीकी विचार प्रस्तुत करने का अवसर भी मिला। इसमें कुल 12 नव उद्यम विचारों का चयन किया गया। चयनित विचारों में कृषि स्कैन, व्यापार सेतु, स्मार्ट केयर, जल रिसाव निवारण, प्रयोगशाला सेतु और मोबाइल सहयोगात्मक रोबोट सहित अन्य नवाचार आधारित परियोजनाएं शामिल रहीं।

विद्यार्थियों ने निर्णायक मंडल के सामने अपने विचारों का प्रस्तुतीकरण किया। बेहतर प्रस्तुतीकरण के लिए नवनीत यादव की टीम ‘मोबाइल सहयोगी रोबोट’ को प्रथम पुरस्कार के रूप में 25 हजार रुपये प्रदान किए गए। वहीं ऋषभ श्रीवास्तव, शोजाब रिजवी और उनकी टीम ‘प्रयोगशाला सेतु’ को उपविजेता के रूप में सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री युवा उद्यमी और स्वरोजगार योजनाओं की दी जानकारी

कार्यक्रम में प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और महिला सशक्तीकरण से संबंधित योजनाओं की विस्तृत जानकारी भी विद्यार्थियों को दी गई। अधिकारियों और विशेषज्ञों ने बताया कि इन योजनाओं के माध्यम से युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता, मार्गदर्शन और अन्य जरूरी सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।

आयोजकों का जोर इस बात पर रहा कि शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले युवाओं के भीतर मौजूद नवाचार क्षमता को पहचानकर उसे उद्यम के रूप में विकसित किया जाए। इससे विद्यार्थियों के लिए स्वरोजगार के अवसर बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को भी गति मिल सकती है।

25 शहरों के 30 प्रमुख महाविद्यालयों में होगा आयोजन

‘यूपी राइज’ कार्यक्रम को प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों के युवाओं तक पहुंचाने की योजना है। इसके तहत 25 शहरों के 30 प्रमुख महाविद्यालयों में ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों के माध्यम से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को बड़े उद्योगों और संस्थानों से जोड़ने के साथ प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जाएगा।

सरकार की इस पहल में युवाओं को शिक्षा के साथ उद्यमिता और नवाचार से जोड़ने की रणनीति दिखाई देती है। यदि विद्यार्थियों के नवाचार आधारित विचारों को उचित मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता और बाजार उपलब्ध कराया जाता है तो इससे प्रदेश में नए उद्यमों के विस्तार और रोजगार सृजन को मजबूती मिल सकती है।

आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को मिलेगा आधार

‘यूपी राइज’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए सरकार उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले युवाओं को नए विचारों और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है। नव उद्यमों की बढ़ती संख्या, महिला नेतृत्व की भागीदारी और तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहन प्रदेश में बदलते कारोबारी परिवेश के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

प्रदेश सरकार का लक्ष्य युवाओं को अवसर, संसाधन और मार्गदर्शन उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। रायबरेली से शुरू हुआ यह संवाद प्रदेश के अन्य शहरों तक पहुंचने के साथ युवाओं को रोजगार मांगने के बजाय रोजगार देने की दिशा में आगे बढ़ाने का माध्यम बनने की उम्मीद है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img

Latest

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -

More articles

- Advertisement -
- Advertisement -