वॉशिंगटन/तेहरान, 22 जुलाई (वेब वार्ता)। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच दोनों देशों की ओर से सैन्य कार्रवाई को लेकर नए दावे सामने आए हैं। अमेरिकी केंद्रीय सैन्य कमान ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई करने का दावा किया है, जबकि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही है। दोनों पक्षों के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
अमेरिकी केंद्रीय सैन्य कमान के अनुसार उसकी सेना ने ईरान के सैन्य कमान केंद्रों, समुद्री ठिकानों, मिसाइल एवं ड्रोन प्रक्षेपण स्थलों तथा वायु रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाया। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उन पर संभावित हमलों की क्षमता को कमजोर करना है।
अमेरिकी केंद्रीय सैन्य कमान ने यह भी दावा किया कि मई की शुरुआत से उसकी सेनाओं ने लगभग 900 वाणिज्यिक जहाजों तथा करीब 45 करोड़ बैरल कच्चे तेल की सुरक्षित आवाजाही में सहायता प्रदान की है। अमेरिका का कहना है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात सामान्य बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी और सुरक्षा अभियान चलाए जा रहे हैं।
इस बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जॉर्डन में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद ईरान को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी अमेरिकी सैनिक को नुकसान पहुंचाया गया तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। ट्रंप ने कहा कि इस संबंध में आवश्यक निर्देश रक्षा नेतृत्व और सैन्य अधिकारियों को दे दिए गए हैं।
वहीं, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने दावा किया है कि उसने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी बलों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। संगठन के अनुसार यह कार्रवाई कथित रूप से “ऑपरेशन नस्र-2” के तहत की गई। हालांकि, इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और अमेरिकी पक्ष की ओर से तत्काल आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर संभावित प्रभाव को देखते हुए कूटनीतिक प्रयासों की आवश्यकता पर भी जोर दिया जा रहा है।




