भोपाल, 20 जुलाई (वेब वार्ता)। भोपाल जिले के ईटखेड़ी क्षेत्र स्थित राताताल के रोजीवे गांव में कथित अवैध उत्खनन का मामला एक बार फिर चर्चा में है। 15 एकड़ भूमि पर स्वीकृत खुदाई की आड़ में बड़े पैमाने पर कोपरा निकालकर बेचने के आरोपों के बीच जिला खनिज विभाग की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा द्वारा मामले की दोबारा समीक्षा के संकेत दिए जाने के बावजूद तीसरी जांच अब तक शुरू नहीं हो सकी है।
जानकारी के अनुसार, 15 एकड़ भूमि पर लगभग 40 हजार घनमीटर खुदाई की अनुमति दी गई थी। आरोप है कि इस अनुमति का दुरुपयोग करते हुए हरिचरण, शैलेंद्र भदौरिया और शेखर पंवार ने लगभग 600 डंपर कोपरा निकालकर बाजार में बेच दिया। इस पूरे मामले में जिला प्रशासन को बड़े पैमाने पर राजस्व हानि होने की आशंका भी जताई जा रही है।
कलेक्टर की फटकार के बाद जिला खनिज अधिकारी मेहताब सिंह रावत ने खनिज निरीक्षक सुचि माथुर से दो बार जांच कराई, लेकिन दोनों जांच प्रतिवेदनों पर सवाल उठने के बाद भी तीसरी जांच नहीं हो सकी। बताया जा रहा है कि पहली जांच में केवल अनुमति की शर्तों के उल्लंघन का उल्लेख किया गया, जबकि कथित अवैध उत्खनन का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया। घटनास्थल पर मौजूद 12 डंपरों को भी जब्त नहीं किए जाने पर सवाल उठाए गए।
इसके बाद दोबारा कराई गई जांच में लगभग 40 लाख 40 हजार रुपये की दंडात्मक राशि प्रस्तावित की गई। हालांकि जब प्रकरण कलेक्टर के समक्ष पहुंचा तो उन्होंने प्रस्तावित राशि को कम बताते हुए मामले की पुनः समीक्षा और तीसरी जांच के संकेत दिए। इसके बावजूद खनिज विभाग का कहना है कि उसे इस संबंध में अब तक कोई लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।
सूत्रों के अनुसार मामले में लगभग डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य के कोपरा के कथित अवैध उत्खनन की आशंका व्यक्त की जा रही है। उपखंड अधिकारी ने भी पूरे प्रकरण की विस्तृत प्रतिवेदन तलब की है। दूसरी ओर, जांच प्रतिवेदनों को लेकर लगातार यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि वास्तविक स्थिति को पूरी तरह सामने नहीं लाया गया।
उल्लेखनीय है कि राताताल क्षेत्र में अवैध उत्खनन का यह पहला मामला नहीं है। लगभग एक वर्ष पहले भी इसी क्षेत्र में अवैध खनन के मामले में चार करोड़ 76 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। उस कार्रवाई के दौरान एक पोकलेन मशीन और नौ डंपर जब्त किए गए थे। उस मामले में शेखर पंवार, दशरथ यादव और जीवन सिंह राठौर को आरोपी बनाया गया था।
इसी प्रकार हरिचरण के खेत पर भी नायब तहसीलदार की टीम ने कथित अवैध उत्खनन का मामला पकड़ा था। इसके बावजूद वर्तमान प्रकरण में प्रस्तुत दोनों जांच प्रतिवेदनों को लेकर लीपापोती के आरोप लगाए जा रहे हैं।
जिला खनिज अधिकारी मेहताब सिंह रावत ने कहा कि विभाग को तीसरी जांच के लिए अभी तक कोई लिखित निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। उनके अनुसार खनिज विभाग केवल परिवहन अनुमति जारी करता है और उत्खनन की मात्रा के आधार पर नियमानुसार दंडात्मक राशि प्रस्तावित की गई है। उन्होंने कहा कि यदि कलेक्टर की ओर से लिखित आदेश प्राप्त होते हैं तो विभाग तीसरी बार भी जांच कराने के लिए तैयार है।




