ईरानी विदेश मंत्री का बड़ा बयान, भारत को बताया पश्चिम एशिया में शांति का अहम भागीदार

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नई दिल्ली, 15 मई (वेब वार्ता)। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भारत की भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत क्षेत्र में शांति स्थापित करने में महत्वपूर्ण और रचनात्मक भूमिका निभा सकता है। नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने पहुंचे अराघची ने भारत की कूटनीतिक भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि ईरान किसी भी सकारात्मक पहल का स्वागत करता है।

प्रेस वार्ता के दौरान अराघची ने कहा कि भारत और ईरान के बीच संबंध बेहद महत्वपूर्ण हैं और दोनों देशों के रिश्ते आपसी सम्मान तथा साझा हितों पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि भारत के दुनिया के कई देशों के साथ मजबूत संबंध हैं और यही वजह है कि वह क्षेत्रीय शांति प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा सकता है।

ईरानी विदेश मंत्री ने उन देशों का भी आभार जताया जिन्होंने हालिया घटनाओं के दौरान ईरान के समर्थन में आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि भारत सरकार सहित कई देशों ने ईरान पर हुए हमलों की निंदा कर एकजुटता दिखाई, जिसकी ईरान सराहना करता है।

ऊर्जा सहयोग पर बोलते हुए अराघची ने कहा कि यदि भारत ईरान से ईंधन खरीदना चाहता है तो ईरान ऊर्जा संसाधन उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं।

इस दौरान उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर भी तीखा हमला बोला। अराघची ने कहा कि ईरान बिना किसी उकसावे के आक्रामक कार्रवाई का शिकार हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कूटनीतिक प्रयास जारी थे, उसी दौरान ईरान पर हमला किया गया।

उन्होंने कहा कि ईरान हमेशा कूटनीति में विश्वास करता आया है और आज भी कूटनीतिक समाधान चाहता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कहा कि ईरान को अमेरिका पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। अराघची के अनुसार पिछली बार भी कई दौर की बातचीत के बाद हमला किया गया था और इस बार भी वही स्थिति दोहराई गई।

उन्होंने कहा कि अमेरिका लगातार दबाव की नीति अपनाता रहा है और बातचीत के दौरान अपने लक्ष्य बदलता रहा, जिससे किसी समझौते तक पहुंचना संभव नहीं हो सका। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की चिंताओं का समाधान किए बिना कोई भी वार्ता सफल नहीं हो सकती।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के मुद्दे पर बोलते हुए अराघची ने कहा कि ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं चाहता था और उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। उन्होंने कहा कि जहां तक ईरान का सवाल है, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला हुआ है, बशर्ते वहां से गुजरने वाले जहाज उन देशों से संबंधित न हों जो ईरान के खिलाफ संघर्ष में शामिल हैं।

अराघची ने दावा किया कि ईरान ने भारतीय जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने में सहायता दी है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि इस क्षेत्र में असुरक्षा की स्थिति अमेरिका की नीतियों के कारण उत्पन्न हुई है।

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