मुंबई, 10 मई (वेब वार्ता)। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक रोहित पवार ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के एक अधिकारी की गिरफ्तारी को लेकर केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि डीजीसीए के एयरवर्थनेस विभाग के उप निदेशक की गिरफ्तारी ने विभाग में फैले भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया है। साथ ही उन्होंने कहा कि गिरफ्तार अधिकारी केवल “छोटी मछली” है और विभाग में इससे भी बड़े स्तर पर गड़बड़ियां मौजूद हैं।
रोहित पवार ने सामाजिक माध्यम पर जारी बयान में कहा कि उनकी पार्टी लंबे समय से डीजीसीए में भ्रष्ट अधिकारियों की मौजूदगी का मुद्दा उठाती रही है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा की गई गिरफ्तारी ने उनके आरोपों को सही साबित कर दिया है। उनके अनुसार विभाग में कई ऐसे अधिकारी मौजूद हैं, जिनकी भूमिका की गहराई से जांच होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि विमान हादसे की जांच को लेकर दो महीने पहले सीबीआई जांच की मांग की गई थी, लेकिन अब तक एजेंसी ने मामले को आधिकारिक रूप से अपने हाथ में नहीं लिया है। रोहित पवार ने कहा कि इसके बावजूद सीबीआई की हालिया कार्रवाई कई महत्वपूर्ण संकेत देती है।
रोहित पवार ने यह भी दावा किया कि विमान दुर्घटना में किसी साजिश की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि चार्टर ऑपरेटर और डीजीसीए अधिकारियों के बीच भ्रष्टाचार का जाल मौजूद हो सकता है। उनके अनुसार नियामकीय शर्तों को पूरा दिखाने के लिए पायलट के उड़ान घंटों के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर किया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सुरक्षा चूकों को छिपाने के उद्देश्य से कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर के साथ छेड़छाड़ की गई हो सकती है। हालांकि इन आरोपों की अब तक किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी विधायक ने लियरजेट 45 विमान की उड़ान अनुमति पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि विमान में पहले से तकनीकी खामियों की शिकायतें थीं और विमान संचालित करने वाली कंपनी पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी लग चुके थे। इसके बावजूद विमान को उड़ान की अनुमति कैसे दी गई, इसकी जांच होनी चाहिए।
रोहित पवार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू को पत्र लिखकर पूरे मामले की विस्तृत और पारदर्शी जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए जरूरी है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
फिलहाल सीबीआई और डीजीसीए की ओर से रोहित पवार के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं राजनीतिक हलकों में इस बयान के बाद विमान सुरक्षा और नियामकीय व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है।




