तेहरान, 3 मई (वेब वार्ता)। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने युद्ध समाप्त करने की जोरदार अपील की है। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष का खामियाजा पूरे क्षेत्र को भुगतना पड़ रहा है और अब समय आ गया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय मिलकर इसे रोकने के लिए आगे आए।
एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए इलाही ने कहा कि युद्ध ने क्षेत्र के हर देश को प्रभावित किया है और निर्दोष नागरिक इसकी सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं। उन्होंने सभी देशों से आग्रह किया कि वे अमेरिका और इजरायल पर युद्ध रोकने के लिए दबाव बनाएं, जिससे क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल हो सके।
न्याय और निष्पक्षता की मांग
इलाही ने कहा कि वर्तमान हालात में सबसे अधिक जरूरत निष्पक्षता और न्याय की है। उन्होंने सवाल उठाया कि ईरान से जवाब मांगने के बजाय उन देशों से प्रश्न किया जाना चाहिए जिन्होंने इस संघर्ष की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि यदि युद्ध रोकने की अपील प्रभावी रूप से की जाती है, तो स्थिति शीघ्र सामान्य हो सकती है।
ईरान को युद्ध में शामिल होने पर मजबूर किया गया
उन्होंने दावा किया कि ईरान ने इस संघर्ष से बचने के लिए कई प्रयास किए और विभिन्न स्तरों पर प्रस्ताव भी दिए, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनीं कि देश को युद्ध में शामिल होना पड़ा। उनके अनुसार, ईरान युद्ध नहीं चाहता था, बल्कि उसे इसमें धकेला गया।
हमले और भारी नुकसान का आरोप
इलाही ने आरोप लगाया कि इजरायल और अमेरिका ने योजनाबद्ध तरीके से ईरान पर व्यापक हमले किए। उन्होंने कहा कि इन हमलों में बड़ी संख्या में नागरिकों की जान गई और सार्वजनिक ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा। उनके अनुसार, हजारों नागरिकों की मौत हुई है, हजारों घायल हुए हैं और बड़ी संख्या में घर, अस्पताल तथा शैक्षणिक संस्थान क्षतिग्रस्त हुए हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हमलों के दौरान नागरिक क्षेत्रों, यहां तक कि स्कूलों को भी निशाना बनाया गया, जिससे भारी जनहानि हुई। इलाही के अनुसार, यह किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
ईरान का रुख और संघर्ष की स्थिति
इलाही ने कहा कि विरोधी पक्ष का उद्देश्य ईरान की सरकार को शीघ्र गिराना था, लेकिन वे अपने लक्ष्य में सफल नहीं हो सके। उन्होंने बताया कि ईरान ने लंबे समय तक संघर्ष का सामना किया और आत्मसमर्पण करने से इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा कि विरोधी देशों द्वारा बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग की गई थी, जिसे ईरान ने अस्वीकार कर दिया। अंततः परिस्थितियां ऐसी बनीं कि संघर्ष विराम का प्रस्ताव सामने आया।
संघर्ष विराम पर भी तनाव बरकरार
इलाही ने बताया कि संघर्ष विराम लागू होने के बावजूद स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं है। उनके अनुसार, ईरान की ओर आने-जाने वाले जहाजों की आवाजाही पर रोक जैसे कदम अभी भी तनाव को बनाए हुए हैं। उन्होंने इसे “न पूरी तरह युद्ध, न पूरी तरह शांति” की स्थिति बताया।
देश में सामान्य जीवन का दावा
उन्होंने कहा कि ईरान में आम जीवन सामान्य रूप से चल रहा है और लोग अपने दैनिक कार्य कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश अपनी सुरक्षा के प्रति पूरी तरह सतर्क है और किसी भी परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार है। इलाही ने अंत में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाएं, ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित हो सके।



