नई दिल्ली, 28 अप्रैल (वेब वार्ता)। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक तेल आपूर्ति पर साफ दिखाई देने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा के कारण कच्चे तेल की आवाजाही प्रभावित हो रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। इसका सीधा असर भारत सहित कई देशों पर पड़ रहा है।
इस संकट के बीच कुछ देशों को आर्थिक लाभ भी हो रहा है। विशेष रूप से पनामा नहर अब तेल परिवहन का वैकल्पिक मार्ग बन गई है, जहां से गुजरने वाले जहाजों से भारी शुल्क वसूला जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, होर्मुज मार्ग अवरुद्ध होने के कारण तेल और गैस के जहाज अब पनामा नहर का रुख कर रहे हैं। हालांकि यह रास्ता भी आसान नहीं है। नहर से गुजरने के लिए जहाजों की नीलामी की जा रही है, जिसमें बोली करीब 40 लाख डॉलर यानी लगभग 37 करोड़ रुपये तक पहुंच रही है। इससे नहर प्रबंधन को भारी राजस्व प्राप्त हो रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पहले इस मार्ग से गुजरने के लिए जहाजों को औसतन 3 से 4 लाख डॉलर का शुल्क देना पड़ता था। इसके अतिरिक्त तेज मार्ग सुविधा के लिए ढाई से तीन लाख डॉलर तक अतिरिक्त शुल्क लिया जाता था। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में “प्राथमिकता प्रवेश” के नाम पर यह अतिरिक्त शुल्क भी बढ़कर 4.25 लाख डॉलर से अधिक हो गया है।
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से विश्व के कुल तेल उपभोग का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। यह तेल भारत के गुजरात तट तक पहुंचता है, जहां से देश के विभिन्न हिस्सों में इसकी आपूर्ति की जाती है।
मौजूदा हालात में इस मार्ग के बाधित होने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है और वैकल्पिक मार्गों पर निर्भरता बढ़ गई है। इसी स्थिति का लाभ उठाते हुए पनामा नहर प्राधिकरण अधिक शुल्क वसूल कर रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो तेल की कीमतों में और वृद्धि संभव है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।



