नई दिल्ली, 26 अप्रैल (वेब वार्ता)। डिजिटल बैंकिंग क्षेत्र से एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है, जिसमें पेटीएम पेमेंट्स बैंक में ग्राहकों के लगभग 800 करोड़ रुपये अब भी फंसे होने का मामला उजागर हुआ है। यह स्थिति तब है जब भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा इसके संचालन पर रोक लगाए जाने के करीब दो वर्ष बीत चुके हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस कुल राशि में से लगभग 400 करोड़ रुपये ऐसे खातों में पड़े हैं, जिन्हें अब तक किसी ने दावा ही नहीं किया है। वहीं शेष राशि का बड़ा हिस्सा उन खातों में है, जो विभिन्न कारणों से फ्रीज कर दिए गए हैं। आश्चर्यजनक तथ्य यह भी है कि पिछले एक वर्ष में अनक्लेम्ड राशि में कोई उल्लेखनीय कमी नहीं आई है, जबकि ग्राहकों को लगातार सूचनाएं भेजी जाती रही हैं।
नियामकीय कार्रवाई से पहले बैंक के पास 5500 करोड़ रुपये से अधिक की जमा राशि थी, जो अब घटकर लगभग 800 करोड़ रुपये रह गई है। एक समय इस बैंक के पास लगभग 35 करोड़ खातों का बड़ा ग्राहक आधार था, लेकिन बाद में इनमें से केवल 10 से 10.5 करोड़ खाते ही सक्रिय रह गए। बाकी खाते फ्रीज, निष्क्रिय या संदिग्ध श्रेणियों में परिवर्तित हो गए।
सूत्रों के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक ने पेटीएम समूह को ग्राहकों से लगातार संवाद बनाए रखने और उन्हें उनकी जमा राशि निकालने के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए थे। इसके तहत ग्राहकों को अलर्ट और अनुस्मारक भेजने की प्रक्रिया भी अपनाई गई। हाल ही में 24 अप्रैल से बैंक का लाइसेंस आधिकारिक रूप से रद्द कर दिया गया है।
कैसे निकालें अपना पैसा
यदि आपका खाता फ्रीज नहीं है, तो आप सामान्य प्रक्रिया के तहत अपने धन को किसी अन्य बैंक खाते में स्थानांतरित कर सकते हैं। इसके अलावा वॉलेट के माध्यम से भी राशि को बैंक खाते में भेजा जा सकता है।
यदि किसी कारणवश आप एप का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं, तो बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर दावा प्रपत्र भरना होगा। इसके लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड और रद्द चेक जैसे दस्तावेजों की आवश्यकता होगी। इस पूरे मामले ने डिजिटल बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता और उपभोक्ता जागरूकता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।



