महाराष्ट्र का कर्ज 9.32 लाख करोड़ के पार, फिर भी 7.9% ग्रोथ से देश में बना सबसे मजबूत आर्थिक राज्य

मुंबई, डेस्क | वेब वार्ता

महाराष्ट्र का सार्वजनिक कर्ज वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 9.32 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। यह पिछले वर्ष के 8.39 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 18.3 प्रतिशत अधिक है। हालांकि कर्ज में बढ़ोतरी के बावजूद राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है और 7.9 प्रतिशत की विकास दर का अनुमान जताया गया है, जो राष्ट्रीय औसत 7.4 प्रतिशत से अधिक है।

आर्थिक सर्वे में सामने आए प्रमुख आंकड़े

पैरामीटरवित्त वर्ष 2024-25पिछला वर्ष
कुल कर्ज₹9,32,242 करोड़₹8,39,000 करोड़
कर्ज वृद्धि18.3%
आर्थिक वृद्धि दर7.9%
भारत की वृद्धि दर7.4%
ब्याज देनदारी₹64,659 करोड़

विधानसभा में वित्त राज्य मंत्री आशीष जायसवाल द्वारा पेश आर्थिक सर्वे रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, कर्ज का बोझ बढ़ने के बावजूद राज्य की अर्थव्यवस्था संतुलित और स्थिर बनी हुई है।

राजकोषीय स्थिति नियंत्रित दायरे में

आर्थिक सर्वे के मुताबिक, महाराष्ट्र का राजकोषीय घाटा राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) का 2.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो निर्धारित सीमा के भीतर है। यह संकेत देता है कि सरकार वित्तीय अनुशासन बनाए रखने में सफल रही है।

  • राजकोषीय घाटा: 2.7% (GSDP के अनुपात में)
  • वित्तीय अनुशासन बरकरार
  • कर्ज के बावजूद स्थिर अर्थव्यवस्था

किन क्षेत्रों में दिखी मजबूती?

क्षेत्रप्रदर्शन
सेवा क्षेत्र9% वृद्धि (सबसे अधिक)
GDP में योगदान14% (देश में सबसे ज्यादा)
FDI हिस्सा31% (देश में सबसे अधिक)
स्टार्टअप हिस्सेदारी17% (शीर्ष स्थान)
नवीकरणीय ऊर्जादेश में तीसरा स्थान

रिपोर्ट में बताया गया है कि सेवा क्षेत्र में 9 प्रतिशत की तेज वृद्धि राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही है। साथ ही महाराष्ट्र का देश के कुल जीडीपी में 14 प्रतिशत योगदान इसे भारत की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में बनाए रखता है।

कर्ज बढ़ने के बावजूद क्यों मजबूत है महाराष्ट्र?

विशेषज्ञों के अनुसार, महाराष्ट्र की मजबूत औद्योगिक आधार, सेवा क्षेत्र की तेजी, उच्च निवेश और स्टार्टअप इकोसिस्टम इसकी अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हैं। कर्ज बढ़ने के बावजूद राज्य की आय और निवेश क्षमता इसे संतुलित बनाए हुए हैं।

  • उच्च FDI आकर्षण
  • मजबूत सेवा और उद्योग क्षेत्र
  • स्टार्टअप और नवाचार में अग्रणी

निष्कर्ष

महाराष्ट्र का कर्ज भले ही 9.32 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया हो, लेकिन आर्थिक सर्वेक्षण यह संकेत देता है कि राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत और स्थिर बनी हुई है। उच्च विकास दर, निवेश और सेवा क्षेत्र की मजबूती इसे देश की आर्थिक रीढ़ बनाए हुए है। हालांकि, भविष्य में कर्ज प्रबंधन और वित्तीय संतुलन बनाए रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती रहेगा।


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